सहरसा के पतरघट अंचल में 300 से अधिक दाखिल-खारिज मामले लंबित,कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Saharsa News: पतरघट अंचल में जनता दरबार की नियमितता पर सवाल. 250-300 दाखिल-खारिज मामले लंबित होने की बात सामने आई. ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की.

By Pratyush Prashant | July 5, 2026 10:51 AM

पतरघट (सहरसा) से राजेश कुमार सिंह

Saharsa News: जमीन का एक छोटा-सा विवाद कई परिवारों के लिए वर्षों की परेशानी बन जाता है. सरकार ऐसे मामलों के त्वरित समाधान के लिए हर सप्ताह जनता दरबार आयोजित करने के निर्देश दे चुकी है. लेकिन सहरसा के पतरघट अंचल में तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है. यहां भूमि विवादों के निपटारे की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों का आरोप है कि जनता दरबार नियमित रूप से नहीं होने से सैकड़ों मामले लंबित पड़े हैं.

फरियादियों का कहना है कि उन्हें बार-बार अंचल कार्यालय और थाने का चक्कर लगाना पड़ रहा है. वहीं दाखिल-खारिज और परिमार्जन के मामलों में भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती दिख रही है.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

जनता दरबार नहीं लगा, फरियादी लौटे निराश

राज्य सरकार ने सभी अंचलों में अंचलाधिकारी और संबंधित थाना अध्यक्ष की संयुक्त उपस्थिति में नियमित जनता दरबार आयोजित कर भूमि विवादों का समयबद्ध समाधान करने का निर्देश दिया है.

लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पतरघट अंचल में यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो रही है. शनिवार को प्रारंभिक पड़ताल के दौरान अंचलाधिकारी की अनुपस्थिति और राजस्व अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण जनता दरबार आयोजित नहीं हो सका. इससे कई फरियादी बिना सुनवाई के वापस लौट गए.

Saharsa News: 300 से अधिक दाखिल-खारिज मामले लंबित होने का दावा

स्थानीय लोगों का कहना है कि अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज और परिमार्जन से जुड़े बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं. कई आवेदकों का आरोप है कि वर्षों पहले आवेदन देने के बावजूद अब तक उनका काम पूरा नहीं हुआ है.

राजस्व अधिकारी जयंती झा ने भी बताया कि दाखिल-खारिज के लगभग 250 से 300 मामले लंबित हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि परिमार्जन के लंबित मामलों की सटीक जानकारी उनके पास नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि वह अवकाश पर थीं और शनिवार को जनता दरबार क्यों नहीं लगा, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है.

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ग्रामीणों ने लगाए कई आरोप

कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अंचल कार्यालय में अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण छोटे-छोटे भूमि विवाद भी लंबे समय तक लंबित रहते हैं. उनका कहना है कि बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बावजूद कार्य संस्कृति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है.

कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सीएससी ऑपरेटर मदन कुमार और डाटा ऑपरेटर रूपेश कुमार रंजन का कार्यालय की निर्णय प्रक्रिया में बढ़ता हस्तक्षेप कामकाज को प्रभावित कर रहा है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.

सीओ से संपर्क नहीं हो सका, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों के अनुसार वर्तमान अंचलाधिकारी का विभागीय निर्देश के तहत स्थानांतरण हो चुका है और नए सीओ ने अभी योगदान नहीं दिया है. आरोप है कि वर्तमान सीओ सहरसा से कार्यालय का संचालन कर रहे हैं.

इस संबंध में सीओ प्रिंस प्रकाश से सरकारी और निजी मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली की समीक्षा, कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच, लंबित दाखिल-खारिज और परिमार्जन मामलों के शीघ्र निष्पादन, जनता दरबार के नियमित आयोजन तथा अधिकारियों और कर्मियों की उपस्थिति की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जनता दरबार नियमित रूप से आयोजित हो और लंबित मामलों के निष्पादन के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, तो अधिकांश भूमि विवादों का समय पर समाधान संभव हो सकता है.

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