आज का दर्शन : सावन में शिवमय होता बाबा मटेश्वर धाम, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता परिसर

Baba Mateshwar Dham Saharsa: सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर की धार्मिक महत्ता, स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता, सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ तथा मंदिर से जुड़ी आस्था और इतिहास पर विशेष रिपोर्ट.

By Shruti Kumari | July 6, 2026 8:37 AM

सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट

Baba Mateshwar Dham Saharsa: सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के काठो गांव स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार है. वर्षों से यह मंदिर शिवभक्तों की अटूट आस्था, लोकविश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यही वजह है कि आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक एवं दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं.

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को शांत, आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण का अनुभव होता है. सुबह की मंगल आरती से लेकर देर शाम तक यहां श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही बनी रहती है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बाबा मटेश्वरनाथ की कृपा से पूरे क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

स्वयंभू शिवलिंग से जुड़ी है प्राचीन मान्यता

बाबा मटेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीनता और लोकआस्था है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुआ था. तभी से यहां नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा निरंतर चली आ रही है.

सावन माह में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं. पूरे मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से वातावरण शिवमय बना रहता है.

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

सावन एवं महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा मटेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. विशेष रूप से मुंगेर जिले के छर्रापट्टी से शिवभक्त गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. यह क्रम पूरे सावन माह तक चलता है और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं.

महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के सहयोग से दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है. इस दौरान भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक, वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के बीच बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाता है.

श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से चढ़ाते हैं बेलपत्र और धतूरा

मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु बाबा को बेलपत्र, धतूरा, पुष्प एवं विशेष प्रसाद अर्पित करते हैं. प्रतिदिन शाम की आरती में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

धार्मिक पर्यटन के रूप में भी बढ़ रही पहचान

स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा मटेश्वर धाम अब धार्मिक पर्यटन के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ ग्रामीण संस्कृति, प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक शांति का भी अनुभव करते हैं.

मंदिर परिसर में लगातार विकसित हो रही सुविधाओं के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा मटेश्वरनाथ के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है.

और पढ़ें: मक्का बेचने वालों के लिए झटका, चावल किसानों के लिए राहत, सहरसा मंडी का ताजा भाव जारी