सहरसा का रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर, जहां शक्ति साधना और आस्था का अद्भुत संगम देखने दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

Aaj Ka Darshan : सहरसा के मत्स्यगंधा परिसर में स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शक्ति उपासना, तंत्र साधना और गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है. कोसी ही नहीं, बिहार और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां मां रक्तकाली के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां कभी खाली नहीं जाती.

By Pratyush Prashant | July 3, 2026 7:38 AM

Aaj Ka Darshan : हर मंदिर की अपनी एक पहचान होती है, लेकिन कुछ ऐसे भी तीर्थ होते हैं जहां पहुंचते ही वातावरण बदल जाता है. घंटियों की गूंज, धूप-अगरबत्ती की सुगंध, मंत्रोच्चार और मां शक्ति के प्रति अटूट विश्वास. सहरसा का रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर भी ऐसा ही एक स्थान है, जहां श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनोखा संगम देखने को मिलता है.

कोसी क्षेत्र की आस्था का बड़ा केंद्र है यह मंदिर

सहरसा के मत्स्यगंधा परिसर स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. मंदिर की पहचान केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे शक्ति साधना और तंत्र उपासना के महत्वपूर्ण स्थलों में भी गिना जाता है.

स्थानीय लोगों के अनुसार यहां मां रक्तकाली और चौसठ योगिनियों की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही विश्वास हर दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं को इस मंदिर तक खींच लाता है.

मां रक्तकाली और चौसठ योगिनियों की अनोखी उपासना

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शक्ति की उपासना में इन योगिनियों का विशेष स्थान माना जाता है.

भक्त मां रक्तकाली के साथ चौसठ योगिनियों के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति करते हैं. यही कारण है कि दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु यहां नियमित रूप से पहुंचते हैं.

सुबह की आरती से लेकर शाम की रोशनी तक रहता है भक्तिमय माहौल

मंदिर परिसर में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है. दिनभर पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और आरती का क्रम चलता रहता है.

शाम होते ही मंदिर की आकर्षक रोशनी पूरे परिसर को दिव्य स्वरूप दे देती है. भक्तों के लिए यह समय विशेष रूप से आध्यात्मिक अनुभव का होता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम की महाआरती में शामिल होने वाले श्रद्धालु अलग ही शांति का अनुभव करते हैं.

नवरात्र और काली पूजा में उमड़ता है जनसैलाब

रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर का सबसे भव्य स्वरूप नवरात्र और काली पूजा के दौरान देखने को मिलता है. इन अवसरों पर हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

सुबह की आरती से लेकर देर रात तक भजन-कीर्तन, वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा का आयोजन होता है. मां रक्तकाली का विशेष श्रृंगार किया जाता है और महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

दीपों की रोशनी और भक्तिमय वातावरण पूरे मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है.

पटना: बांकीपुर से प्रशांत किशोर चुनाव लड़ेंगे या नहीं, अंतिम फैसला 5 जुलाई को होगा.

Aaj Ka Darshan : सौंदर्यीकरण से और बढ़ा मंदिर का आकर्षण

पिछले कुछ वर्षों में मंदिर परिसर के विकास और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के साथ परिसर को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है.

इसका असर यह हुआ है कि अब यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालु दर्शन के साथ-साथ परिसर की आध्यात्मिक और शांत वातावरण का भी आनंद लेते हैं.

आस्था के साथ धार्मिक पर्यटन को भी मिल रहा बढ़ावा

रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर सहरसा के धार्मिक पर्यटन की पहचान बनता जा रहा है. यहां आने वाले श्रद्धालु स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती देते हैं. त्योहारों और विशेष अवसरों पर बढ़ने वाली भीड़ से आसपास के छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को भी लाभ मिलता है.

स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि मां रक्तकाली के दरबार से कोई भी श्रद्धालु निराश होकर नहीं लौटता. इसी विश्वास ने इस मंदिर को कोसी क्षेत्र के सबसे प्रमुख शक्ति पीठों में एक विशेष स्थान दिलाया है.

बिहार की अन्य ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें

पटना: ”बिहार में जो कचड़ा भगाने का काम चल रहा है, वो चलते रहेगा”. बिहार में अपराधियों के एनकाउंटर पर CM सम्राट का बड़ा संकेत.