Motihari Teacher Inquiry: सिसवा उर्दू स्कूल के शिक्षक पर पहचान छुपाकर नौकरी पाने का आरोप, त्रि-सदस्यीय समिति करेगी जांच

Motihari Teacher Inquiry: सिसवा उर्दू विद्यालय के शिक्षक मो. शमशाद आलम की फर्जी पहचान और नियुक्ति के आरोपों पर एडीएम शैलेंद्र कुमार भारती ने त्रि-सदस्यीय समिति गठित कर 30 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है.

By सुनील कुमार सिंह | July 2, 2026 1:04 PM

मोतिहारी के बंजरिया से राज निखिल की रिपोर्ट

Motihari Teacher Inquiry: जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सह एडीएम शैलेंद्र कुमार भारती ने राजकीय मध्य विद्यालय, सिसवा उर्दू के शिक्षक मो. शमशाद आलम की नियुक्ति और पहचान से जुड़े गंभीर मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. परिवादी आमिर हुसैन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उक्त शिक्षक ने अपनी वास्तविक पहचान, पिता का नाम और पता छुपाकर मो. रफीक को फर्जी पिता दर्शाया है और गलत पते पर नौकरी प्राप्त की है.

वास्तविक पहचान और पिता के नाम को छुपाने का आरोप

परिवादी का आरोप है कि आरोपी शिक्षक का वास्तविक नाम सफी अहमद है और उनका मूल निवास चिरैया प्रखंड के ग्राम टोलापुर में है. शिकायत में यह भी बड़ा दावा किया गया है कि शिक्षक द्वारा जिन्हें अपना पिता बताया गया है, वे वास्तव में ट्रांसजेंडर हैं, जो इस पूरे मामले को और भी अधिक संदिग्ध व पेचीदा बनाता है. इस शिकायत के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलके में खलबली मच गई है.

पूर्व की जांच रिपोर्ट में शिक्षक के गायब रहने से फंसा पेंच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में गठित की गई जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि शिक्षक शमशाद आलम जांच के दौरान खुद उपस्थित नहीं हुए थे, जिससे उनका पक्ष नहीं जाना जा सका. इसके साथ ही, बंजरिया प्रखंड विकास पदाधिकारी ने माना था कि संबंधित शिक्षक के मूल निवास और पारिवारिक पृष्ठभूमि की पूरी जांच करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, जिससे आरोपों की सत्यता स्पष्ट नहीं हो सकी थी.

त्रि-सदस्यीय समिति को 30 दिनों में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

इन तथ्यों के आधार पर, एडीएम शैलेंद्र कुमार भारती ने मामले में पुनः एक त्रि-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. इस नई समिति में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता) को अध्यक्ष और चिरैया एवं बंजरिया के प्रखंड विकास पदाधिकारियों को सदस्य नामित किया गया है. समिति को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षक की वास्तविक पहचान, उनके पिता का नाम, स्थायी निवास और नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपें.

ये भी पढ़ें: मीना बाजार में दिनदहाड़े झपटमारी, महिला के गले से सोने की चेन लेकर भागे बदमाश