अबुआ जादुई पिटारा से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार तक, पढ़ें देवघर की श्वेता शर्मा की जर्नी

National Teacher Award 2026: झारखंड के देवघर की सरकारी शिक्षिका श्वेता शर्मा ने अपनी इनोवेटिव सोच से एक बंद होने की कगार पर खड़े ग्रामीण स्कूल की सूरत बदल दी. उन्होंने 'अबुआ जादुई पिटारा' नामक एक खास टॉय-बेस्ड लर्निंग किट और गेमिफाइड शिक्षण पद्धति के जरिए बच्चों के लिए पढ़ाई को बेहद मजेदार बना दिया.

By Bhumi Sharma | May 30, 2026 12:24 PM

National Teacher Award: कहते हैं कि अगर शिक्षक के भीतर कुछ नया करने का जज्बा हो, तो वह ब्लैकबोर्ड और चॉक के बिना भी बच्चों के भविष्य में रंग भर सकता है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है झारखंड के देवघर जिले की एक सरकारी शिक्षिका ने. आज हम बात करेंगे राजकीय मध्य विद्यालय विवेकानंद की श्वेता शर्मा के बारे में, जिन्होंने शिक्षा के प्रति अपने अनूठे और जादुई प्रयोगों से न सिर्फ एक दम तोड़ते ग्रामीण स्कूल को पुनर्जीवित किया बल्कि देश का सर्वोच्च शिक्षक सम्मान राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार भी अपने नाम किया है. आइए जानते हैं फर्श से अर्श तक की उनकी यह बेहद प्रेरणादायक कहानी.

National Teacher Award 2026: जब बंद होने की कगार पर था स्कूल

शुरुआती दिनों में जब श्वेता शर्मा ने इस ग्रामीण स्कूल में कदम रखा तो वहां सन्नाटा पसरा रहता था.बच्चे स्कूल आने से कतराते थे, माता-पिता का भरोसा उठ चुका था और स्कूल बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था. श्वेता जी ने तुरंत भांप लिया कि पारंपरिक रटने वाली पढ़ाई से बच्चों को बांधकर नहीं रखा जा सकता. उन्होंने तय किया कि अगर बच्चे किताबों से दूर भाग रहे हैं तो पढ़ाई को उनके पास खेल के रास्ते से ले जाया जाएगा. उन्होंने प्ले-वे और एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग को अपना हथियार बनाया और देखते ही देखते महज दो साल के भीतर स्कूल में बच्चों का तांता लग गया.

‘अबुआ जादुई पिटारा’ जिसने पढ़ाई को बनाया इंटरेस्टिंग

श्वेता शर्मा के इस सफर में सबसे अनोखी और खूबसूरत खोज रही अबुआ जादुई पिटारा’.झारखंड की समृद्ध जनजातीय विरासत और लोक संस्कृति को समेटे हुए यह एक ऐसी टॉय-बेस्ड लर्निंग किट है जिसे उन्होंने खुद तैयार किया. उनका यह मानना था की इस जादुई पिटारे से जब स्वदेशी खिलौने,पहेलियां और स्थानीय कहानियों के पात्र बाहर आते हैं तो बच्चे गणित, विज्ञान और भाषा जैसे कठिन विषयों को हंसते-खेलते सीख जाते हैं.

ऐसे इंटरेस्टिंग आईडिया,और नए तौर-तरीकों से सीखने की ये टेकनीक ने बच्चों के भीतर स्कूल आने का ऐसा उत्साह भरा कि इस स्कूल का ड्रॉपआउट रेट लगभग शून्य हो गया.

कोरोना काल में बनीं मसीहा,संयुक्त राष्ट्र तक गूंजा नाम

उनकी संवेदनशीलता सिर्फ सामान्य दिनों तक सीमित नहीं रही. जब कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया घरों में कैद थी और गरीब बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई थी. तब श्वेता जी ने ‘कॉपी एक्सचेंज प्रोग्राम’की शुरुआत की.इस पीयर-टू-पीयर नोट शेयरिंग नेटवर्क ने ग्रामीण बच्चों के बीच शिक्षा की कड़ियां टूटने नहीं दीं.

उनके इस प्रयास को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली और इसके लिए उन्हें ‘प्रामेरिका इंटरनेशनल अवार्ड’ से नवाजा गया. इतना ही नहीं उनकी इस अनूठी पहल के कारण उनके छात्रों को संयुक्त राष्ट्र (UN) के यूथ प्रोग्राम का हिस्सा बनने का गौरव भी प्राप्त हुआ.

देश भर के शिक्षकों के लिए बनीं रोल मॉडल

स्टेट लेवल पर सिलेबस और इनोवेटिव लर्निंग मटेरियल तैयार करने में अपना अहम योगदान देने वाली श्वेता शर्मा आज देश भर के शिक्षकों के लिए एक आदर्श बन चुकी हैं. उन्होंने यह दिखा दिया की अगर चाह हो तो इंसान कुछ भी पा सकता है.

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