संस्कृत यूनिवर्सिटी में होगा BTech AI प्रोग्राम, मन की बात में PM मोदी ने की नालंदा विश्वविद्यालय की तारीफ

Mann Ki Baat by PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में हायर एजुकेशन पर बात की है. उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की सराहना की और साथ ही बताया कि दिल्ली स्थित सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी में जल्द ही Artificial Intelligence और Data Science में BTech प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है.

By Ravi Mallick | June 28, 2026 12:27 PM

Mann Ki Baat by PM Modi: देश में अब पढ़ाई का अंदाज तेजी से बदल रहा है. एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीक भविष्य की दुनिया तैयार कर रही है, तो दूसरी तरफ भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा को भी नए रूप में दुनिया के सामने लाया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात (Mann Ki Baat by PM Modi) के 135वें एपिसोड में इसी बदलाव की बारे में बात की.

Mann Ki Baat में पीएम ने बताई संस्कृत में AI की ताकत

पीएम मोदी ने कहा कि सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी का नया BTech AI प्रोग्राम सिर्फ इंजीनियरिंग की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा. इसका मकसद भारतीय भाषाओं के लिए नए AI टूल्स तैयार करना भी है. इससे संस्कृत समेत कई भारतीय भाषाओं में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा मिलेगा.

साथ ही देश के प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने का काम भी तेज होगा. आसान शब्दों में कहें तो अब टेक्नोलॉजी सिर्फ भविष्य नहीं बनाएगी, बल्कि हमारे अतीत को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगी.

नालंदा विश्वविद्यालय में शास्त्रार्थ की परंपरा

प्रधानमंत्री मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय की खास तौर पर तारीफ करते हुए कहा कि वहां भारत की प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा को फिर से शुरू किया गया है. उन्होंने याद दिलाया कि दो साल पहले उन्हें नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन करने का अवसर मिला था. उनके मुताबिक शास्त्रार्थ का मतलब केवल अपनी बात रखना नहीं होता. यह तर्क, संवाद, विचार-विमर्श और अनुशासित चर्चा की एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें लोग तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखते हैं और दूसरों की राय को भी धैर्य से सुनते और समझते हैं.

प्रधानमंत्री ने खुशी जताई कि नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ को अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लगभग आधे छात्र दूसरे देशों से थे. इससे साफ है कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है.

यह भी पढ़ें- 21 परीक्षाएं दीं, 14 में मिली निराशा…फिर BPSC के पहले ही प्रयास में 23वीं रैंक, MP की बेटी बिहार में बनेगी SDM