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झारखंड बजट : उद्योग के बजट में हुई 132 करोड़ की कटौती

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झारखंड बजट : उद्योग के बजट में हुई 132 करोड़ की कटौती

सरकार ने जहां कल्याण एवं समाज कल्याण पर फोकस किया है. हालांकि उद्योग के क्षेत्र में बहुत ज्यादा कुछ करने से सरकार बची है. सरकार उद्योग विभाग में न तो कोई नयी योजना लेकर आयी है और न ही किसी पुरानी योजना को बंद किया है.

सरकार ने जहां कल्याण एवं समाज कल्याण पर फोकस किया है. हालांकि उद्योग के क्षेत्र में बहुत ज्यादा कुछ करने से सरकार बची है. सरकार उद्योग विभाग में न तो कोई नयी योजना लेकर आयी है और न ही किसी पुरानी योजना को बंद किया है. हालांकि, बजट में 132.33 करोड़ रुपये की कटौती की गयी है. सरकार ने बुनकर सहयोग समतियों, हस्तकरघा कलस्टर एवं हस्तकरघा ग्रुप को सुदृढ़ करने की बात कही है. उत्पादन बढ़ाने के लिए इस बार तीन हजार मीट्रिक टन तसर रेशम के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है.

उद्योग विभाग के तहत संचालित मिनी टूल रांची, दुमका में स्थानीय एवं ग्रामीण उद्योगों के लिए उन्नत तकनीक एवं उपकरण उपब्ध कराये जायेंगे. नये उद्योग स्थापित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के निर्माण पर जोर दिया गया है. यानी जियाडा के अधीन जितने भी औद्योगिक क्षेत्र हैं वहां सड़क, ड्रेनेज, बिजली जैसी आधारभूत संरचना का निर्माण होगा. पूंजी निवेश के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को और दुरुस्त करने की बात कही गयी है.

सरकार ने अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए बजट में कई प्रावधान किये हैं. जिसमें 13 नये एकलव्य विद्यालय भी खोले जायेंगे. जनजातीय समुदाय के वीर शहीदों के गांव के सर्वांगीण विकास की बात कही गयी है. इस बार हार्डकोर पुअर के तहत संथाल-परगना के पांच हजार आदिम जनजाति परिवारों को गरीबी की जटिलता से बाहर निकालने का लक्ष्य रखा गया है.

वहीं, 1790 आदिवासी बाहुल्य गांवों में रह रहे 2.18 लाख परिवारों के सशक्तीकरण का लक्ष्य भी रखा गया है. वनाधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक पट्टा निर्गत किया जायेगा. महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा के तहत सरकार ने राष्ट्रीय एवं राज्य विधवा पेंशन योजना, आदिम जनजातियों की पेंशन योजना, निशक्ततता पेंशन योजना आदि के तहत 2599 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजने की बात कही है. 1.40 लाख लाभुकों को प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का लाभ देने पर जोर दिया गया है.

10 लाख किशोरियों को विकास यात्रा में शामिल करने पर जोर दिया गया है. 50 हजार किशोरियों को अनौपचारिक शिक्षा एवं दो लाख किशोरियों को कौशल विकास से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार ने इस बार के बजट में उनलोगों तक पहुुंचने की कोशिश की है, जो अबतक विकास से अछूते रहे गये थे.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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