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झारखंड बजट : किसानों से किये वादों को पूरा करने पर जोर

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झारखंड बजट : किसानों से किये वादों को पूरा करने पर जोर

हेमंत सोरेन की सरकार ने बजट में कृषि एवं उससे जुड़े सेक्टर में कई व्यापक बदलाव किये हैं. पूर्व सरकार के अंतिम वित्तीय वर्ष में शुरू की गयी मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना को बंद कर दिया है. कृषि विभाग द्वारा करायी जा रही तालाब जीर्णोद्धार स्कीम का संचालन अब केवल खानापूर्ति के नाम पर होगा. पिछली सरकार में आशीर्वाद योजना के लिए 2000 करोड़ तथा तालाब जीर्णोद्धार के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान था.

सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों को दिये जाने वाले कृषि उपकरण बैंक में राशि की कटौती कर दी है. वैसे पिछले दो साल से इस योजना का लाभ महिलाओं के ग्रुप को नहीं मिल रहा है. हेमंत सोरेन की सरकार का जोर चुनाव के दौरान किसानों से किये गये वादों को पूरा करने में है. इस कारण हेमंत सोरेन ने क्रमवार किसानों का ऋण माफ करने के लिए स्कीम में बदल दिया है. जबकि पशुपालन विभाग में कोई विशेष बदलाव नहीं किया है. पशुपालन को मजबूत करने के लिए कोई विशेष योजना भी नहीं दी है.

वहीं, कृषि और पशु चिकित्सा को मजबूत करने के लिए संचालित संस्थाओं के संचालन पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गयी है. पिछली सरकार ने कई तकनीकी महाविद्यालय तो खोल दिये थे, लेकिन इसका संचालन अब तक नहीं हो रहा है. जल संसाधन विभाग में सरकार ने कई नयी जलाशय योजना प्रस्तावित नहीं की है. पुरानी जलाशय योजनाओं को ही पूरा करने पर सरकार का जोर है.

राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार से संबंधित कई काम तो हुए, लेकिन कई काम अधूरे रह गये. पिछले वर्ष में कुल 129 करोड़ रुपये का बजट था. इस राशि से सारे अंचलों के भू अभिलेखों का डिजिटलाइजेशन करना था. वहीं, ऑनलाइन लगान भुगतान की सुविधा देनी थी. इन कार्यों में काफी हद तक सफलता मिली है. मॉडर्न रिकॉर्ड रूम का काम अधूरा रह गया है. नक्शों के डिजिटलाइजेशन का कार्य पूर्ण कर लेने का दावा किया गया है. राजस्व कचहरी सह हल्का कर्मचारी आवास का काम हुआ है, लेकिन वह पूर्ण नहीं हो पाया है. इसके लिए 50.45 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे.

सारे अंचल कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में काम हुआ है, लेकिन अभी भी काम बाकी है. खाद्य आपूर्ति विभाग ने खाद्यान्न के परिवहन में उपयोग में लगे वाहनों में जीपीएस लगाने की घोषणा की थी. यह अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पायी. राज्य खाद्य निगम में मानव संसाधन की भारी कमी है. इसको दूर करने के लिए पिछली सरकार ने प्रयास किया. नियमावली बना ली गयी, लेकिन बहाली नहीं हो पायी.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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