एनएचएम में 298 पदों पर बहाली प्रक्रिया रद्द, सीएमओ ने दिया जांच का आदेश

एनएचएम झारखंड के अंतर्गत 298 संविदा पदों पर बहाली में गड़बड़ी के मामले ने तूल पकड़ लिया है.

By PRABHAT GOPAL JHA | February 11, 2026 12:03 AM

रांची. एनएचएम झारखंड के अंतर्गत 298 संविदा पदों पर बहाली में गड़बड़ी के मामले ने तूल पकड़ लिया है. बहाली प्रक्रिया के तरीकों पर आपत्ति जतायी गयी थी. वहीं योग्य अभ्यर्थियोें को चयन सूची से बाहर रखने का मामला उजागर हुआ था. जिसके बाद बहाली प्रक्रिया रद्द कर दी गयी. वहीं इसका विज्ञापन 20 जून 2025 को प्रकाशित हुआ था. इसकी जानकारी झारखंड ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन समिति ने स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को दी है. अब संभवत: फिर नये सिरे से विज्ञापन को प्रकाशित किया जायेगा.

मानदेय भी तय किया गया था

एनएचएम कार्यालय द्वारा वरीय अस्पताल प्रबंधक के 39 पद, अस्पताल प्रबंधक-201 पद, वित्तीय प्रबंधक (फाइनेंस मैनेजर)-29 पद और आइटी एग्जीक्यूटिव के 29 पद के विरुद्ध अनुबंध आधारित नियुक्ति की जानी थी. इसके लिए 41,000 से 60, 000 रुपये तक मानदेय भी तय हुआ था. इस मामले में मुख्यमंत्री सचिवालय ने एनएचएम के प्रशासनिक पदाधिकारी के माध्यम से मानव संसाधन कोषांग (एचआर सेल) से स्पष्टीकरण मांगा था. अभ्यर्थियों की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस पूरे प्रकरण की जांच कराने का निर्देश दिया था. उस वक्त मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया, जिसमें अगले 15 दिनों में की गयी कार्रवाई से अवगत कराने के लिए भी कहा गया था. मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव घनश्याम प्रसाद सिंह द्वारा भेजे गये पत्र में कहा गया था कि एनएचएम झारखंड के तहत राज्यस्तरीय 298 पदों पर की जा रही संविदा आधारित नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करें.

नियुक्ति प्रक्रिया के तरीकों पर की गयी थी आपत्ति

एनएचएम में नियुक्तियों के लिए 28-29 नवंबर को प्रक्रिया की जानी थी. लेकिन इससे पहले 31 अक्तूबर को एक चिठ्ठी निकाली गयी. जिसे लेकर आपत्ति जतायी गयी. इसके अनुसार अभ्यर्थियों द्वारा डॉक्यूमेंट को पुन: अपलोड कर दावा किया जाना था. लेकिन एक और दो नवंबर तक ही इसके लिए समय निर्धारित था, जबकि तीन को वॉकिंग इंटरव्यू की तारीखें तय थी. अस्पताल प्रबंधक पद के लिए आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद जारी सूची में कई योग्य अभ्यर्थियों को नॉट शॉर्ट लिस्टेड बताया गया. बाद में जांच के दौरान 29 ऐसे अभ्यर्थियों को गलत तरीके से बाहर रखने की पुष्टि हुई. वहीं, चयन में कुछ ऐसे अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट करने की बात कही गयी, जो निर्धारित अर्हता और अनुभव पूरी नहीं करते थे.