जीप चालक को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 17 साल से दैनिक वेतनभोगी बने कर्मचारी होंगे नियमित
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने जामताड़ा के दैनिक वेतनभोगी जीप चालक रोशन दास को बड़ी राहत देते हुए नियमितीकरण से इनकार का आदेश रद्द कर दिया. कोर्ट ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर उनकी सेवा नियमित करने का निर्देश दिया और सभी आपत्तियों को निराधार माना.
रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने जामताड़ा जिला कल्याण विभाग में वर्ष 2009 से दैनिक वेतनभोगी (डेली वेज) के रूप में कार्यरत जीप चालक रोशन दास को बड़ी राहत दी है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार द्वारा 15 दिसंबर 2025 को उनके नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) के दावे को खारिज करने के आदेश को रद्द करते हुए आठ सप्ताह के भीतर उनकी सेवा नियमित करने का निर्देश दिया है. अदालत ने माना कि सरकार ने लंबे समय तक उनकी सेवाएं लेने के बाद केवल तकनीकी आधार पर नियमितीकरण से इनकार किया, जो न्यायसंगत नहीं है.
2009 से कर रहे थे सेवा
याचिकाकर्ता रोशन दास जुलाई 2009 से जामताड़ा के कल्याण विभाग में रिक्त स्वीकृत पद पर जीप चालक के रूप में कार्यरत हैं. विभाग ने समय-समय पर उनके अनुभव प्रमाणपत्र जारी किए और मानदेय भुगतान के लिए भी पत्राचार किया. दस वर्ष से अधिक सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने 16 सितंबर 2019 को नियमितीकरण के लिए आवेदन दिया. इसके बाद जिला कल्याण पदाधिकारी ने उनकी सेवा संबंधी विवरणी सरकार को भेजी. मामले में कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने 2 जनवरी 2024 को संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था. इसके बाद जिला एवं प्रमंडलीय नियमितीकरण समितियों ने भी उनके पक्ष में अनुशंसा की, लेकिन राज्य स्तरीय समिति ने 15 दिसंबर 2025 को उनका दावा अस्वीकार कर दिया. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भवेश कुमार व अधिवक्ता रवि कुमार ने पक्ष रखा.
सरकार ने नियमितीकरण से इनकार के लिए बताए 4 कारण
राज्य सरकार ने नियमितीकरण का दावा चार आधारों पर खारिज किया था. पहला, नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं की गई थी. दूसरा, 20 जून 2019 की कट-ऑफ तिथि तक दस वर्ष की सेवा पूरी नहीं हुई थी. तीसरा, याचिकाकर्ता मैट्रिक पास नहीं थे. चौथा, चालक की नियुक्ति झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के माध्यम से होनी चाहिए. सरकार का कहना था कि याचिकाकर्ता केवल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी थे और निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते थे, इसलिए उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता.
हाईकोर्ट ने सरकार के सभी तर्कों को किया खारिज
अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति विभागीय पत्र के आधार पर रिक्त स्वीकृत पद पर हुई थी. विभाग ने वर्षों तक उनकी सेवाएं लीं, वेतन का भुगतान किया और लगातार कार्यरत रखा. ऐसे में यह कहना कि नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं हुई थी, स्वीकार्य नहीं है. कट-ऑफ तिथि के मुद्दे पर भी अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता 1 जुलाई 2009 से लगातार सेवा दे रहे हैं और आज भी कार्यरत हैं. केवल तकनीकी आधार पर नियमितीकरण से इनकार उचित नहीं कहा जा सकता, विशेषकर तब जब विभाग स्वयं उनकी सेवाएं लगातार लेता रहा हो.
मैट्रिक योग्यता और जेएसएससी का आधार भी नहीं माना
राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता केवल आठवीं पास हैं. लेकिन अदालत ने पाया कि उन्होंने वर्ष 2017 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी. इसलिए राज्य स्तरीय समिति का यह आधार भी तथ्यात्मक रूप से गलत पाया गया. जेएसएससी के माध्यम से नियुक्ति संबंधी दलील पर अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में यह स्पष्ट है कि अब तक जीप चालक के पद के लिए जेएसएससी द्वारा कोई भर्ती प्रक्रिया आयोजित नहीं की गई थी. ऐसे में इस आधार पर नियमितीकरण से इनकार करना भी उचित नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के जागो बनाम केंद्र सरकार और विनोद कुमार बनाम केंद्र सरकार के फैसलों का जिक्र किया. अदालत ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति पूरी तरह अवैध नहीं बल्कि केवल प्रक्रियागत रूप से अनियमित हो और वह लंबे समय तक स्वीकृत पद पर लगातार सेवा देता रहा हो, तो उसके मामले में मानवीय और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए. अदालत ने यह भी कहा कि उमा देवी फैसले का उद्देश्य अनियमित नियुक्तियों वाले कर्मचारियों के वैध दावों को खारिज करना नहीं, बल्कि अवैध बैकडोर नियुक्तियों पर रोक लगाना था. इसलिए लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के मामलों में नियमितीकरण पर सकारात्मक विचार किया जाना चाहिए.
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आठ सप्ताह में नियमितीकरण का निर्देश
सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 के राज्य स्तरीय समिति के आदेश को रद्द कर दिया. अदालत ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर रोशन दास की सेवा जीप चालक के पद पर नियमित की जाए. इसके साथ ही याचिका स्वीकार करते हुए मामले का निष्पादन कर दिया गया.
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