कोडरमा के तिलैया डैम का विकास अटका, करोड़ों रुपए मिलने के बाद भी काम शुरू नहीं

Koderma News: कोडरमा के तिलैया डैम को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने की योजना अब तक शुरू नहीं हो सकी है. केंद्र से करोड़ों रुपये मिलने के बावजूद राज्य स्तर पर पहल नहीं होने से काम अटका हुआ है और विकास की उम्मीद अधूरी है.इससे जुड़ी पूरी खबर नीचे पढ़ें.

By Priya Gupta | April 25, 2026 10:21 AM

कोडरमा से विकास की रिपोर्ट 

Koderma News: झारखंड के कोडरमा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल तिलैया डैम को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने की योजना पर सिस्टम का ग्रहण लग गया है. केंद्र से करोड़ों रुपये की स्वीकृति और आवंटन के बावजूद अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया है. 

केंद्र से स्वीकृति के बाद भी काम शुरू नहीं

केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने एसएएससीआइ योजना के तहत नवंबर 2024 में तिलैया डैम के विकास को मंजूरी दी थी. इसके तहत करीब 34.87 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे, लेकिन आज तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है. जबकि केंद्र सरकार पहले ही करीब 23 करोड़ 77 लाख रुपये राज्य सरकार को दे चुकी है. करीब दस महीने से यह राशि राज्य के पर्यटन विभाग के पास पड़ी है, लेकिन योजना के लिए कैबिनेट एप्रूवल तक नहीं लिया गया है.

फंड उपयोग पर उठे सवाल, राज्य सरकार पर निशाना

तिलैया डैम के विकास को लेकर केंद्र सरकार से स्वीकृति दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री सह कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी के अनुसार राशि राज्य सरकार के पास पड़ी है़ इसका समय पर उपयोग नहीं होना सवाल उठा रहा है. प्रभात खबर के द्वारा इस संंबंध में सवाल पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने इसको लेकर राज्य सरकार पर निशाना भी साधा है. जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में चिन्हित तिलैया डैम की तस्वीर बदलने को लेकर इसे ‘इको टूरिज्म’ के रूप में विकसित करने को लेकर वर्ष 2024 में अन्नपूर्णा देवी ने केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखा था़. इसके बाद नवंबर 2024 में मंत्रालय ने करीब 35 करोड़ रुपये की ‘इको टूरिज्म डेवलपमेंट ऑफ तिलैया डैम’ नाम से योजना को मंजूरी दी. पर्यटन मंत्रालय ने एसएएससीआइ योजना के तहत तिलैया डैम के साथ ही 23 राज्यों में 40 विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्रों के विकास को मंजूरी दी थी. इस मंजूरी के बाद तिलैया डैम की तस्वीर बदलने की आस जगी थी, लेकिन आज तक कोई काम नहीं हो सका है. 

हजारों लोग पहुंचते हैं तिलैया डैम, सुविधाओं का है अभाव

कोडरमा के बराकर नदी पर स्थित तिलैया डैम दामोदर घाटी निगम द्वारा निर्मित स्वतंत्र भारत का पहला डैम होने के साथ ही सुंदर प्राकृतिक परिवेश के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. खूबसूरत नजारे को अपने में समेटे हुए तिलैया डैम को देखने हर वर्ष हजारों लोग पहुंचते हैं. करीब 35 वर्ग किमी में फैले तिलैया डैम के पास मुलभूत सुविधाओं का अभाव रहने के कारण पर्यटकों को परेशानी होती है. ऐसे में पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को लेकर यहां पेयजल, शौचालय, बिजली, यातायात, रेस्टोरेंट व गेस्ट हाउस जैसी सुविधाएं बहाल करने की जरूरत है. 

राज्य सरकार गंभीर नहीं, फंड मिलता है तो खर्च ही नहीं होता : अन्नपूर्णा

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि करीब एक वर्ष से केंद्र के द्वारा करोड़ों रुपये आवंटित किए जाने के बाद भी तिलैया डैम को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने को लेकर राज्य स्तर से कोई पहल नहीं है़ एक तरफ राजय सरकार केंद्र पर फंड नहीं देने का आरोप लगाती है, जबकि जो फंड मिलता है उसका समय पर व सही उपयोग नहीं हो रहा है. तिलैया डैम का अगर विकास होता तो यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ते़ राज्य सरकार को इस मामले को लेकर गंभीर होने की जरूरत है़ विकास के कार्य होंगे तभी राज्य व क्षेत्र आगे बढ़ेगा. 

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