खूंटी में आम की बंपर पैदावार, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम 

Mango Production in Khunti : खूंटी के रनिया क्षेत्र के जंगलों में इस वर्ष आम की बंपर पैदावार हुई है, लेकिन उचित बाजार नहीं मिलने से किसान निराश हैं. हाथियों के खतरे के बीच ग्रामीण जोखिम उठाकर आम बेच रहे हैं और बेहतर दाम की उम्मीद लगाए हैं.

By Priya Gupta | June 27, 2026 9:23 AM

रनिया से भूषण कांसी की रिपोर्ट 

Mango Production in Khunti : झारखंड के खूंटी जिले के रनिया प्रखंड के सौदे, जयपुर, लोहागढ़, मरचा, रनिया सहित आसपास के गांवों के जंगलों में इस वर्ष आम की बंपर पैदावार हुई है. पेड़ों पर लदे रसीले आमों ने ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी तो ला दी है, लेकिन बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से यह खुशी अधूरी नजर आ रही है. प्रतिदिन सुबह-सुबह दूरदराज जंगल क्षेत्र गांवों से महिलाएं, पुरुष और बच्चे सिर पर टोकरी और साइकिलों में आम लेकर रनिया ब्लॉक चौक पहुंचते हैं. दिनभर बाजार में आम की खरीद-बिक्री होती है, लेकिन खरीदारों की कमी के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है.

बाजार में नहीं मिल रहा उचित दाम 

ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में इन दिनों हाथियों का आतंक चरम पर है. इसके बावजूद वे रात तीन-चार बजे ही जान जोखिम में डालकर आम चुनने निकल जाते हैं, जिससे सुबह बाजार पहुंचकर आम बेच सकें. कठिन मेहनत और जोखिम उठाने के बाद भी उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है.

खूंटी में आम की बंपर पैदावार, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम  2

मेहनत किसानों की, मुनाफा व्यापारियों का 

65 वर्षीय सुंदइर देवी ने बताया कि वे दूरदराज के जंगलों से सिर पर आम ढोकर बाजार लाती हैं, लेकिन मेहनत के अनुरूप दाम नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि व्यापारी यही आम शहरों में कहीं अधिक कीमत पर बेचते हैं, जबकि किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पाता.

आम की अच्छी पैदावार, बेहतर दाम की उम्मीद 

सुलोचना कुमारी ने कहा कि जंगलों में हाथियों का डर हमेशा बना रहता है. फिर भी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वे अहले सुबह जंगल में आम चुनने जाती हैं. इसके बाद भी बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से निराशा होती है. वहीं बांधनी देवी ने बताया कि इस बार आम बेचकर करीब दो हजार रुपये कमाने का लक्ष्य रखा है, जिससे खेती-बारी के कार्यों में मदद मिलेगी. दूसरी ओर विरशमुनि देवी ने कहा कि इस वर्ष नरेगा के तहत विकसित बागवानी में भी आम की अच्छी पैदावार हुई है. उन्हें उम्मीद है कि यदि बाजार में उचित दाम मिले तो किसानों की आय में अच्छी बढ़ोतरी होगी.

प्रशासन ने किसानों से संगठित बिक्री की अपील की

इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत डांग ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखें और संगठित होकर आम की बिक्री करें. उन्होंने कहा कि प्रशासन किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा. साथ ही उन्होंने किसानों से जंगलों में हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए पूरी सतर्कता बरतने और किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाने की सलाह दी. ग्रामीणों का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर आम की खरीद और विपणन की बेहतर व्यवस्था हो जाए तो जंगलों की यह प्राकृतिक संपदा किसानों की आर्थिक स्थिति को और मजबूत कर सकती है.

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