गुमला में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल: समय पर एंबुलेंस न मिलने से 2 घरों के बुझे चिराग, दोनों घंटों तड़पते रहे

Gumla Healthcare Condition: गुमला जिले के घाघरा और पालकोट में समय पर 108 एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण दो युवकों की मौत हो गई. स्वास्थ्य विभाग की बदहाली पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. पढ़ें, पूरी रिपोर्ट.

By Sameer Oraon | July 3, 2026 10:40 PM

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla Healthcare Condition, गुमला : गुमला जिले के ग्रामीण इलाकों में सरकारी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और एंबुलेंस व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण दो युवकों को अपनी जान गंवानी पड़ी. परिजनों का सीधा आरोप है कि अगर सरकारी ‘108’ एंबुलेंस या स्वास्थ्य केंद्र से गाड़ी समय पर मिल जाती, तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी. इन घटनाओं ने एक बार फिर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल कर रख दी है.

सड़क हादसे के बाद 2 घंटे तक नहीं मिली एंबुलेंस

पहली घटना घाघरा थाना क्षेत्र के सलगी भुड़ियाटोली गांव की है. यहां 22 वर्षीय मंगलेश्वर उरांव की सड़क दुर्घटना के बाद एंबुलेंस न मिलने से मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, मंगलेश्वर गुरुवार की रात करीब 7 बजे स्कूटी से एक बच्चे के छठी समारोह में शामिल होने घाघरा जा रहा था. इसी दौरान नीमढलान के पास एक अज्ञात वाहन ने उसकी स्कूटी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी. घटना की सूचना मिलते ही घाघरा पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवक को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) घाघरा ले गई. डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे सदर अस्पताल गुमला रेफर कर दिया. लेकिन अस्पताल ले जाने से पहले ही मंगलेश्वर ने दम तोड़ दिया. वह तमिलनाडु में मजदूरी करता था और एक महीने पहले ही घर लौटा था. शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. ग्रामीणों ने घाघरा सीएचसी में 24 घंटे एंबुलेंस तैनात रखने की मांग की है.

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क्या कहते हैं मृतक के भाई

“रेफर किए जाने के बाद हम दो घंटे तक एंबुलेंस के लिए तड़पते रहे. न तो सरकारी एंबुलेंस मिली और न ही कोई निजी गाड़ी समय पर आ पाई. अगर वक्त पर गाड़ी मिल जाती, तो मेरा भाई आज जिंदा होता.”

शशि उरांव, मृतक का भाई

जहर खाने के बाद तड़पता रहा कृष्णा

दूसरी हृदयविदारक घटना पालकोट थाना क्षेत्र के मरदा गांव में घटी, जहां 34 वर्षीय कृष्णा लोहरा की संदिग्ध परिस्थितियों में (आशंका है कि जहर खाने से) मौत हो गई. कृष्णा अपनी पत्नी भागमंती देवी के साथ रांची में रहकर मजदूरी करता था. बुधवार रात वह रांची से गुमला पहुंचा था, लेकिन रात में गांव जाने के लिए कोई साधन न मिला तो वह पूरी रात गुमला बस स्टैंड पर ही बीता दी. गुरुवार सुबह 11:30 बजे वह अपने घर पहुंचा. शाम करीब 4:30 बजे जब उसकी मां भीखनी देवी खेत से लौटीं, तो उन्होंने कृष्णा को कमरे में तड़पते हुए देखा. परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस के लिए संपर्क किया, लेकिन दो घंटे तक कोई सरकारी वाहन नहीं पहुंचा. आखिरकार, थक-हारकर परिजनों ने एक टेंपो (ऑटो) की व्यवस्था की और उसे लेकर सदर अस्पताल गुमला पहुंचे. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. कृष्णा अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और दो बेटे छोड़ गया है. वह अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था. उसने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया, इसकी जांच में पुलिस जुटी हुई है.

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