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Home बिहार सहरसा रोटी की तलाश में जोखिम में जान : जनसेवा एक्सप्रेस में दरवाजों से लटक कर सफर कर रहे मजदूर

रोटी की तलाश में जोखिम में जान : जनसेवा एक्सप्रेस में दरवाजों से लटक कर सफर कर रहे मजदूर

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रोटी की तलाश में जोखिम में जान : जनसेवा एक्सप्रेस में दरवाजों से लटक कर सफर कर रहे मजदूर

पंजाब जाने वाले श्रमिकों का बढ़ा पलायन, अतिरिक्त कोच व स्पेशल ट्रेन की मांग तेज

सिमरी बख्तियारपुर. पूर्णिया कोर्ट-अमृतसर जनसेवा एक्सप्रेस इन दिनों मजदूरों के पलायन की प्रमुख कड़ी बनी हुई है. पंजाब की मंडियों और अन्य कार्यस्थलों पर रोजगार की तलाश में कोसी-सीमांचल क्षेत्र से बड़ी संख्या में मजदूर रोजाना रवाना हो रहे हैं. भीड़ का आलम यह है कि ट्रेन में चढ़ने के लिए विभिन्न स्टेशनों पर अफरा-तफरी की स्थिति बन रही है. सोमवार को भी जनसेवा एक्सप्रेस में भारी भीड़ देखने को मिली. ट्रेन में जगह बनाने के लिए यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की होती रही. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा. कई यात्री ट्रेन छूटने के डर से दरवाजों पर लटक कर सफर करते नजर आए. ऐसे हालात किसी भी समय बड़े हादसे को आमंत्रण दे सकते हैं.

रोजगार की तलाश में पंजाब की ओर कर रहे रुख

जानकारी के अनुसार, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा एवं आसपास के जिलों से प्रतिदिन हजारों मजदूर पंजाब की मंडियों और उद्योगों में काम करने के लिए रवाना हो रहे हैं. लेकिन यात्रियों की बढ़ती संख्या के बावजूद रेलवे द्वारा न तो अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं और न ही कोई स्पेशल ट्रेन चलायी गयी है. इससे यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है. यात्रियों का कहना है कि टिकट लेने के बावजूद उन्हें बैठने तो दूर, खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती. उनका आरोप है कि रेलवे यात्रियों से पूरा किराया तो वसूल रहा है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है.

पलायन की पटरी पर दौड़ती मजबूरियां

जनसेवा एक्सप्रेस की भीड़ सिर्फ यात्रियों की संख्या नहीं, बल्कि क्षेत्र में रोजगार संकट की तस्वीर भी बयां करती है. गांवों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण मजदूरों को अपने परिवार से दूर सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है. यह उनकी पसंद नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुकी है. हर साल इसी मौसम में मजदूरों की संख्या बढ़ती है, लेकिन रेलवे की तैयारियां नाकाफी साबित होती हैं. अतिरिक्त कोच या विशेष ट्रेनों की व्यवस्था नहीं होने से प्लेटफॉर्म पर अफरातफरी और ट्रेनों में जानलेवा भीड़ आम बात बन गयी है.

मासूम बच्चों और महिलाओं की बढ़ी परेशानी

भीषण भीड़ का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और छोटे बच्चों पर देखने को मिला. कई महिलाएं गोद में बच्चों को लेकर ट्रेन में चढ़ने के लिए संघर्ष करती नजर आयीं. एक महिला अपने मासूम बच्चे को चादर की झोली बनाकर संभालते हुए सफर करने को मजबूर दिखी. वहीं कई यात्री सीट नहीं मिलने पर किसी तरह सामान रखने की जगह और कोच के कोनों में बैठकर यात्रा करते नजर आए. भीड़ के बीच यात्रियों ने जुगाड़ के सहारे सफर तो शुरू कर दिया, लेकिन पूरी यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे ही रही. यह दृश्य रेलवे की अपर्याप्त व्यवस्था और मजदूरों की मजबूरी दोनों की कहानी बयां कर रहा था.

हादसे की आशंका के बीच उठ रहे सवाल

जनसेवा एक्सप्रेस में ओवर क्राउडिंग अब सामान्य दृश्य बन चुकी है, लेकिन यह स्थिति बेहद खतरनाक है. दरवाजों पर लटक कर सफर करते यात्री, कोचों के भीतर ठसाठस भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था का अभाव हर पल दुर्घटना की आशंका बढ़ा रहा है. यात्रियों का कहना है कि रेलवे को पहले से भीड़ का अंदाजा रहता है, फिर भी पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते. मजदूरों में इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दे रही है. उनका सवाल है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था की नींद टूटेगी. यदि समय रहते रेलवे ने अतिरिक्त कोच और स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था नहीं की, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.

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