रेल हादसे में 416 डाउन पैसेंजर ट्रेन की सात बोगियां बागमती नदी में समा गयी थीं
आज भी रूह कंपा देती है देश की सबसे भयावह रेल त्रासदी
आयुष गुप्ता, सिमरी बख्तियारपुर
छह जून 1981 का वह मनहूस दिन आज भी कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लोगों के जेहन में ताजा है. आज से 45 वर्ष पहले हुए बागमती रेल हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. मानसी से सहरसा आ रही 416 डाउन पैसेंजर ट्रेन की सात बोगियां बदला घाट और धमारा घाट के बीच बागमती नदी में समा गयी थी. यह दुर्घटना भारतीय रेल इतिहास की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे भयावह रेल त्रासदियों में गिनी जाती है. घटना के समय ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी. शादी-विवाह का मौसम होने के कारण डिब्बों के भीतर, दरवाजों पर और छत तक यात्रियों की भीड़ थी.