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Home झारखण्ड धनबाद कोर्ट मैरिज के बाद जेल के शिव मंदिर में शादी कर रहे थे दूल्हा-दुल्हन, जेलर ने रुकवाई रस्म

कोर्ट मैरिज के बाद जेल के शिव मंदिर में शादी कर रहे थे दूल्हा-दुल्हन, जेलर ने रुकवाई रस्म

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कोर्ट मैरिज के बाद जेल के शिव मंदिर में शादी कर रहे थे दूल्हा-दुल्हन, जेलर ने रुकवाई रस्म
धनबाद के मंडल कारा के शिव मंदिर में बैठी दुल्हन कंचन और दूल्हा दिलीप यादव. फोटो: प्रभात खबर

धनबाद से प्रतीक पोपट की रिपोर्ट

Dhanbad News: धनबाद मंडल कारा परिसर स्थित शिव मंदिर में शुक्रवार को एक अनोखा मामला सामने आया, जिसने पूरे शहर में चर्चा का विषय बना दिया. कोर्ट मैरिज कर चुके एक जोड़े के परिजन पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज से विवाह की शेष रस्में पूरी कराने के लिए जेल परिसर स्थित शिव मंदिर पहुंचे थे. विवाह की रस्में चल ही रही थीं कि सूचना मिलने पर जेल प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए कार्यक्रम को बीच में ही रुकवा दिया. जेल प्रशासन का कहना है कि बिना पूर्व अनुमति जेल परिसर में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना नियमों के खिलाफ है. नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद विवाह समारोह को तत्काल रोक दिया गया.

कोर्ट मैरिज के बाद रीति-रिवाज निभाने पहुंचे थे परिवार

जानकारी के अनुसार, बिहार के आरा निवासी दिलीप यादव और धनबाद के पाथरडीह की रहने वाली कंचन ने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली थी. कानूनी रूप से विवाह संपन्न होने के बाद दोनों परिवारों की इच्छा थी कि पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार बाकी वैवाहिक संस्कार भी पूरे किए जाएं. इसी उद्देश्य से शुक्रवार को दोनों पक्षों के परिजन धनबाद मंडल कारा परिसर स्थित शिवालय पहुंचे. मंदिर में विवाह की तैयारियां की गई थीं और पुरोहित की मौजूदगी में रस्में भी शुरू हो चुकी थीं. दूल्हा-दुल्हन सहित दोनों परिवारों के सदस्य कार्यक्रम में शामिल थे.

सूचना मिलते ही हरकत में आया जेल प्रशासन

विवाह समारोह की जानकारी जैसे ही जेल प्रशासन को मिली, जेल पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई. अधिकारियों ने कार्यक्रम के संबंध में जानकारी ली और अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की. प्रारंभिक जांच में पता चला कि जेल परिसर में विवाह आयोजन के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी. इसके बाद अधिकारियों ने कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया.

जेलर ने दिए कार्रवाई के निर्देश

मामले की जानकारी मिलने के बाद जेलर दिनेश प्रसाद वर्मा ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराई. जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बिना प्रशासनिक स्वीकृति के मंदिर परिसर में विवाह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था. नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद जेलर के निर्देश पर विवाह समारोह को रोक दिया गया. प्रशासन ने मौके पर मौजूद लोगों को भविष्य में नियमों का पालन करने की भी हिदायत दी.

पुरोहित और परिजनों को दी गई समझाइश

जेल प्रशासन ने विवाह संपन्न करा रहे पुरोहित को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जेल परिसर एक संवेदनशील क्षेत्र है और यहां किसी भी प्रकार के आयोजन के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है. परिजनों को भी बताया गया कि प्रशासनिक स्वीकृति के बिना ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना नियमों के अनुरूप नहीं है. इसके बाद समारोह में शामिल लोग धीरे-धीरे वहां से लौटने लगे.

दूल्हा-दुल्हन ने बताई पूरी बात

दूल्हा दिलीप यादव और दुल्हन कंचन ने बताया कि वे एक अधिवक्ता की सलाह पर जेल परिसर स्थित शिव मंदिर में विवाह की शेष धार्मिक रस्में पूरी करने पहुंचे थे. उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि इसके लिए अलग से प्रशासनिक अनुमति लेना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम रोक दिए जाने के बाद वे प्रशासन के निर्णय का सम्मान करते हैं और आगे की रस्में किसी अन्य स्थान पर पूरी करेंगे.

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अब दूसरे मंदिर में पूरी होंगी रस्में

घटना के बाद दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजन बिना विवाह संस्कार पूरा किए वापस लौट गए. लड़की के परिजन द्वारका यादव और अरविंद कुमार यादव ने बताया कि अब किसी अन्य मंदिर में जाकर शेष वैवाहिक रस्में पूरी की जाएंगी. फिलहाल, यह मामला पूरे धनबाद शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि कोर्ट मैरिज के बाद धार्मिक रीति-रिवाजों को पूरा करने के लिए चुना गया स्थान ही विवाह समारोह में बाधा बन गया. घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि किसी भी सरकारी या प्रतिबंधित परिसर में आयोजन करने से पहले संबंधित प्रशासन की अनुमति लेना जरूरी है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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