ई-रिक्शा पर गर्भवती ने दिया बेटे को जन्म, स्ट्रेचर तक नहीं मिला, रैंप से पैदल पहुंची प्रसव वार्ड

मुंगेर सदर अस्पताल में प्रसव पीड़ा से कराहती एक गर्भवती ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही ई-रिक्शा पर बच्चे को जन्म दिया. इसके बाद भी उसे न तो खराब पड़ी लिफ्ट की सुविधा मिली और न ही स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया.

By AJEET KUMAR | July 6, 2026 11:27 PM

मुंगेर से अमित कुमार की रिपोर्ट

Munger News : सरकार जहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं मुंगेर सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था मरीजों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही है. सोमवार को अस्पताल में सामने आया एक मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर गया. प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला ने अस्पताल परिसर में ही ई-रिक्शा पर बेटे को जन्म दिया. इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन की ओर से उसे समय पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं.

जानकारी के अनुसार, सुतुरखाना निवासी सोनू कुमार की पत्नी संजू कुमारी को सोमवार दोपहर करीब दो बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजन उन्हें अपने ई-रिक्शा से लेकर मुंगेर मॉडल अस्पताल पहुंचे. इमरजेंसी वार्ड के मुख्य गेट के समीप पहुंचते ही प्रसव पीड़ा तेज हो गई और संजू कुमारी ने ई-रिक्शा पर ही एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दे दिया. घटना के बाद परिजनों ने तत्काल प्रसव केंद्र के स्वास्थ्यकर्मियों को सूचना दी. सूचना मिलते ही स्वास्थ्यकर्मी मौके पर पहुंचे और मां तथा नवजात की प्राथमिक जांच की.

पहले से ही खराब है अस्पताल की लिफ्ट

हालांकि इसके बाद अस्पताल की बदहाल व्यवस्था सामने आ गई. प्रसूता को प्रथम तल पर संचालित प्रसव वार्ड में ले जाने के लिए अस्पताल की लिफ्ट पहले से ही खराब पड़ी थी. ऐसे में उम्मीद थी कि उसे स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि काफी प्रयास के बावजूद उन्हें स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया.

मजबूरी में नवप्रसूता संजू कुमारी को परिजन अस्पताल के पीछे बने रैंप के रास्ते पैदल सहारा देकर प्रथम तल स्थित प्रसव वार्ड तक लेकर पहुंचे. हाल ही में बच्चे को जन्म देने के बावजूद इस स्थिति में पैदल चलना मां और नवजात दोनों की सेहत के लिए जोखिम भरा माना जाता है. इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई. बाद में प्रसव वार्ड में मां और नवजात को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया. चिकित्सकों के अनुसार दोनों की स्थिति फिलहाल सामान्य है.

मरीजों की शिकायत : अस्पताल में सुविधाओं की कमी

गौरतलब है कि सदर अस्पताल की लिफ्ट लंबे समय से खराब पड़ी है, जिससे विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसके बावजूद अब तक इसे चालू नहीं कराया जा सका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

मामले की होगी जांच : उपाधीक्षक

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. रमन कुमार ने बताया कि खराब लिफ्ट को ठीक कराने के लिए बीएमएसआईसीएल को निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि यदि प्रसूता को स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी. जांच में किसी भी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आने पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर मरीजों और परिजनों में नाराजगी देखी गई.

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