संसाधनों और शिक्षकों के अभाव में भविष्य संवार रहे वानिकी कॉलेज के विद्यार्थी

Bihar Forestry College Munger: फरवरी 2023 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महत्वाकांक्षी संस्थान का उद्घाटन किया था. लगभग 100 एकड़ में फैले इको-फ्रेंडली और भूकंपरोधी परिसर को आधुनिक शिक्षा के मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी.

By Shruti Kumari | June 10, 2026 9:31 AM

देश का दूसरा और बिहार का पहला वानिकी कॉलेज अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा

मुंगेर से वीरेंद्र कुमार सिंह की रिपोर्ट:

Bihar Forestry College Munger: पर्यावरण संरक्षण, वन प्रबंधन और आधुनिक वानिकी शिक्षा के क्षेत्र में नई पीढ़ी तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित बिहार वानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान (बीएफसीआरआई) आज भी संसाधनों और मानवबल की कमी से जूझ रहा है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अधीन संचालित यह संस्थान देश का दूसरा और बिहार का पहला वानिकी कॉलेज है. करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक परिसर होने के बावजूद यहां शिक्षकों, प्रयोगशालाओं, परिवहन सुविधाओं और अन्य बुनियादी संसाधनों का अभाव बना हुआ है.

फरवरी 2023 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महत्वाकांक्षी संस्थान का उद्घाटन किया था. लगभग 100 एकड़ में फैले इको-फ्रेंडली और भूकंपरोधी परिसर को आधुनिक शिक्षा के मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी. यहां बीएससी फॉरेस्ट्री, पर्यावरण विज्ञान और एग्रीकल्चर जैसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. हालांकि पढ़ाई शुरू होने के तीन वर्ष बाद भी कई जरूरी सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं.

74 शिक्षकों के मुकाबले सिर्फ 13 शिक्षक कार्यरत

कॉलेज में 74 शिक्षकों और 130 नन-टीचिंग कर्मियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 13 शिक्षक और 27 नन-टीचिंग कर्मचारी ही कार्यरत हैं. सीमित शिक्षकों के कारण कई विषयों की कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जा रही हैं. छात्रों को विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

कॉलेज में फिलहाल तीन बैच के लगभग 100 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं. विद्यार्थियों का कहना है कि शुरुआती दिनों में बेंच-डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं. समय के साथ कुछ सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन अभी भी लैब, लाइब्रेरी, रिसर्च और फील्ड ट्रेनिंग से जुड़ी सुविधाओं की आवश्यकता बनी हुई है.

लैब और परिवहन सुविधाओं का अभाव

वानिकी शिक्षा में प्रयोगात्मक अध्ययन और फील्ड विजिट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. बावजूद इसके कॉलेज में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई हैं. कई प्रयोग सीमित संसाधनों के बीच कराए जा रहे हैं.

इसके अलावा शैक्षणिक भ्रमण और फील्ड स्टडी के लिए संस्थान के पास अपनी बस भी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में विद्यार्थियों को बाहरी व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता है. छात्रों का कहना है कि वानिकी जैसे तकनीकी विषय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं होता. जंगल, पौधों और पर्यावरणीय गतिविधियों को समझने के लिए नियमित फील्ड विजिट और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है.

एक्रीडेशन को लेकर बढ़ी चिंता

कॉलेज के विद्यार्थियों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता संस्थान के एक्रीडेशन को लेकर है. छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं हुई, तो पहले बैच के विद्यार्थियों के प्रमाणपत्रों की मान्यता और रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं.

हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि एक्रीडेशन और संसाधनों से संबंधित सभी प्रक्रियाओं पर लगातार काम किया जा रहा है.

संसाधन बढ़ाने के लिए जारी है प्रयास

वानिकी महाविद्यालय के डीन डॉ. अनिल पासवान ने बताया कि वर्ष 2024 से कॉलेज पूरी तरह अपने नए परिसर में संचालित हो रहा है. कई विभागों में अभी भी विकास कार्य जारी हैं. शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए सरकार और विश्वविद्यालय स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि प्रयोगशालाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा भी शुरू कर दी गई है. आने वाले समय में संस्थान में और संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास जारी हैं.

सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने

कॉलेज के शिक्षक और वैज्ञानिकों का मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन माध्यम से विशेषज्ञ शिक्षकों की कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं. जूनियर साइंटिस्ट अपर्णा पांडे ने कहा कि यह संस्थान भविष्य में बिहार में वन एवं पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन सकता है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त फंडिंग और संसाधनों की आवश्यकता है.

पर्यावरण संरक्षण और वानिकी शिक्षा की बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू हुआ मुंगेर का यह संस्थान फिलहाल चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है. अब निगाहें सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कब तक इस महत्वाकांक्षी संस्थान को आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित कर पाते हैं, ताकि यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों का भविष्य और अधिक मजबूत एवं सुरक्षित बन सके.