चेंगा नदी के उफान का असर: कलवर्ट के नीचे मिट्टी कटने से धंसी सड़क, मंडियों से संपर्क टूटने का खतरा

Chenga River Road Collapse: ठाकुरगंज प्रखंड में चेंगा नदी की बाढ़ ने तबाही के निशान छोड़ दिए हैं. मानिकपुर-मुरारीगछ मार्ग पर बने कलवर्ट के नीचे की मिट्टी बह जाने से मुख्य सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है, जिससे बिहार को पश्चिम बंगाल सीमा से जोड़ने वाले इस लाइफलाइन रूट पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

By Divyanshu Prashant | June 21, 2026 10:59 AM

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Chenga River Road Collapse: बिहार के सीमांचल क्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड से बाढ़ और बुनियादी ढांचे की बदहाली को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है. दो दिन पूर्व सीमावर्ती चेंगा नदी में आए अचानक उफान और जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण मानिकपुर और मुरारीगछ के बीच स्थित मुख्य मार्ग पर बना कलवर्ट (पुलिया) गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है. कलवर्ट के नीचे की सुरक्षात्मक मिट्टी पूरी तरह कट जाने से पक्की सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है, जिससे इस व्यस्त मार्ग पर वाहनों के परिचालन में हादसे का खतरा चौबीसों घंटे बना हुआ है.

जलकुंभी ने बढ़ाई आफत, रुका पानी तो कट गई सड़क

सड़क धंसने के पीछे की तकनीकी और प्रशासनिक कड़ियों के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं. ग्रामीणों के अनुसार, दो दिन पहले जब चेंगा नदी का पानी बढ़ा, तो वह तेज रफ्तार से कलवर्ट के नीचे से गुजरने लगा.

लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण कलवर्ट के मुहाने पर महीनों से भारी मात्रा में जलकुंभी और कचरा जमा था, जिसने पानी के प्राकृतिक बहाव को पूरी तरह बाधित कर दिया. पानी का बैक-प्रेशर (दबाव) बढ़ने से कलवर्ट के नीचे का आधार (Base) कमजोर हो गया और तेज धार ने नीचे की पूरी मिट्टी काट दी, जिससे ऊपर की पक्की सड़क में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं.

बंगाल सीमा को जोड़ने वाला मुख्य व्यापारिक मार्ग

इस मार्ग के भौगोलिक और आर्थिक महत्व की जानकारियां काफी अहम हैं. यह सड़क ठाकुरगंज प्रखंड मुख्यालय को सीधे पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित मुरारीगछ से जोड़ती है.

सीमांचल के इस इलाके के लिए यह सड़क एक आर्थिक लाइफलाइन है, क्योंकि इसी मार्ग से होकर प्रतिदिन दर्जनों ट्रकों और ट्रैक्टरों के जरिए हरी चायपत्ती, अनानास, मक्का और अन्य नगदी कृषि उत्पाद पश्चिम बंगाल की बड़ी मंडियों और प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों तक पहुंचाए जाते हैं. इसके अलावा रोजाना हजारों की संख्या में किसान, व्यापारी और छात्र इसी मार्ग से आवागमन करते हैं.

ग्रामीणों ने पेड़ की डालियां रखकर खुद संभाला मोर्चा

प्रशासनिक सुस्ती को देखते हुए स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए खुद ही मोर्चा संभाल लिया है. धंसे हुए खतरनाक गड्ढे के पास ग्रामीणों ने हरे पेड़ की डालियां और झाड़ियां रखकर बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार में आने वाले बाइक चालकों और भारी वाहनों को खतरे का अंदाजा दूर से ही हो सके. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क खोखली हो चुकी है और किसी भी भारी ट्रक के गुजरने पर यह पूरी तरह जमींदोज हो सकती है.

कलवर्ट के नीचे की मिट्टी बही

मानसून के बीच बड़ी आपदा की आशंका, जल्द मरम्मत की मांग

“सड़क की बदहाली पर आक्रोश व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने कलवर्ट की सफाई कराई होती, तो आज यह नौबत नहीं आती. अभी मानसून की शुरुआत है, अगर दोबारा तेज बारिश हुई तो यह रास्ता पूरी तरह टूट जाएगा और दर्जनों गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से कट जाएगा. हम प्रशासन से तुरंत आपदा प्रबंधन के तहत यहाँ बोल्डर पिचिंग और मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग करते हैं.”

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Chenga River Road Collapse: क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है विभाग?

चेंगा नदी का उफान भले ही दो दिनों से थमा हुआ है, लेकिन सड़क का यह धंसाव स्थानीय लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुका है. क्षतिग्रस्त स्थल हर गुजरते वाहन के साथ प्रशासनिक मुस्तैदी पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है.

क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के अभियंताओं से अविलंब इस बदहाल स्थल का तकनीकी निरीक्षण करने और स्थायी रूप से कलवर्ट व एप्रोच रोड की मरम्मत कराने की जोरदार मांग की है ताकि सीमांचल के इस महत्वपूर्ण व्यापारिक रूट को ठप होने से बचाया जा सके.

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