जनता के लिए बना था सामुदायिक भवन, अब जलावन और भूसा रखने का बना ठिकाना

Kishanganj News: ग्रामीणों की बैठकों, महिला समूहों और सरकारी योजनाओं का केंद्र बनने के लिए बनाया गया सामुदायिक भवन आज जलावन और भूसा रखने की जगह बन चुका है. सवाल यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी आखिर यह सरकारी संपत्ति लोगों के किसी काम क्यों नहीं आ रही?

By Pratyush Prashant | July 2, 2026 1:59 PM

पौआखाली(किशनगंज) से रणविजय की रिपोर्ट.

Kishanganj News: सरकार गांवों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर सामुदायिक भवनों का निर्माण कराती है. लेकिन किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड की तातपौआ पंचायत में एक ऐसा ही सामुदायिक भवन सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है. सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद की पहल पर जनता की सुविधा के लिए बनाया गया यह भवन अब अपने मूल उद्देश्य से भटककर जलावन और भूसा रखने का स्थान बन गया है.

यह स्थिति केवल एक भवन की बदहाली नहीं, बल्कि सरकारी परिसंपत्तियों के रखरखाव और जवाबदेही की तस्वीर भी सामने लाती है.

जनसुविधा के लिए बना भवन, अब घरेलू सामान का गोदाम

स्थल निरीक्षण में सामुदायिक भवन के भीतर और आसपास जलावन, भूसा और अन्य घरेलू सामान रखा मिला. भवन में किसी सार्वजनिक गतिविधि के संचालन के संकेत नहीं दिखे. लंबे समय से बंद पड़े दरवाजे और रखरखाव की कमी साफ बता रही है कि भवन का नियमित उपयोग नहीं हो रहा.

जिस भवन में ग्रामीण बैठकें, स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियां, सरकारी प्रशिक्षण, स्वास्थ्य शिविर और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए थे, वहां अब जनसुविधा की जगह उपेक्षा नजर आती है.

ग्रामीण बोले, उम्मीदें थीं लेकिन व्यवस्था नहीं बनी

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भवन बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि यहां पंचायत स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम संचालित होंगे. लेकिन समय बीतने के साथ न तो किसी विभाग ने इसकी जिम्मेदारी तय की और न ही पंचायत स्तर पर इसके नियमित संचालन की व्यवस्था बनाई गई.

धीरे-धीरे भवन खाली पड़ा रहा और लोगों ने इसका इस्तेमाल जलावन, भूसा और अन्य सामान रखने के लिए शुरू कर दिया.

ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इसकी उपयोगिता सुनिश्चित की जाती तो आज यह गांव की कई जरूरतों का केंद्र बन सकता था.

लाखों की योजना, लेकिन जवाबदेही किसकी?

यह मामला एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है. जब सरकारी धन से किसी सार्वजनिक भवन का निर्माण होता है तो उसके रखरखाव और उपयोग की जिम्मेदारी आखिर किसकी होती है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग और पंचायत समय-समय पर निरीक्षण करते, तो भवन की यह स्थिति नहीं होती. सरकारी योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब निर्माण के साथ उनके संचालन और निगरानी की भी प्रभावी व्यवस्था हो.

Kishanganj News: आज भी बन सकता है गांव की गतिविधियों का केंद्र

ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन आज भी पंचायत के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. यहां स्वयं सहायता समूहों की बैठकें, सरकारी जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य जांच शिविर, बच्चों के शैक्षणिक कार्यक्रम और विभिन्न सामाजिक आयोजन कराए जा सकते हैं.

ऐसा होने से गांव के लोगों को सीधे लाभ मिलेगा और सरकारी संपत्ति का भी सही उपयोग हो सकेगा.

मुखिया प्रतिनिधि ने बताई वजह

इस मामले पर मुखिया प्रतिनिधि रसमुद्दीन फैज़ ने बताया कि यह सामुदायिक भवन सांसद निधि से पंचायत के सुदूरवर्ती गांव दुराघाटी में पंचायत सरकार भवन के ठीक पीछे बनाया गया है. उनके अनुसार दोनों भवन एक ही परिसर में होने के कारण सामुदायिक भवन का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पा रहा है.

उन्होंने कहा कि पंचायत की ओर से ग्रामीणों को कई बार समझाया गया है कि भवन परिसर में जलावन और फसल न रखें. इसके बावजूद कुछ लोग सामुदायिक भवन और पंचायत सरकार भवन परिसर का उपयोग जलावन रखने तथा फसल सुखाने के लिए कर रहे हैं.

अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग और पंचायत प्रशासन इस भवन को फिर से जनोपयोगी बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं.

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