दो साल भी नहीं टिक पाया 13.76 लाख का छठ घाट, निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

Chhath Ghat Damage: ठाकुरगंज प्रखंड की पथरिया पंचायत में सरकारी राशि का बड़ा दुरुपयोग सामने आया है. वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब 14 लाख रुपये की लागत से बना छठ घाट महज दो वर्षों में ही जमींदोज हो गया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.

By Divyanshu Prashant | July 1, 2026 10:17 AM

Chhath Ghat Damage: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत एक सरकारी निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है. प्रखंड की पथरिया पंचायत में लाखों रुपये की सरकारी लागत से निर्मित एक सार्वजनिक छठ घाट महज दो वर्षों के भीतर ही पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है. इस घटना से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कराए जा रहे विकास कार्यों की तकनीकी गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और वित्तीय गड़बड़ी का सीधा आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच की गुहार लगाई है.

13.76 लाख की लागत; छैतनगुड़ी गांव के पास हुआ था निर्माण

  • योजना का विवरण: आधिकारिक आंकड़ों और निर्माण स्थल पर स्थापित शिलापट्ट के अनुसार, पथरिया पंचायत के वार्ड संख्या-04 स्थित छैतनगुड़ी गांव के समीप नदी तट पर इस छठ घाट का निर्माण कराया गया था.
  • बजट का आवंटन: वित्तीय वर्ष 2022-23 के तहत इस सार्वजनिक घाट के निर्माण पर कुल 13 लाख 76 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी.
  • दरारों से तबाही: ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार द्वारा काम पूरा कर प्रभार सौंपने के कुछ ही महीनों बाद घाट की सीढ़ियों और सुरक्षा दीवारों में हल्की दरारें उभरने लगी थीं. रखरखाव के अभाव और घटिया नींव के कारण समय के साथ ये दरारें इतनी चौड़ी हो गईं कि अब घाट का एक बहुत बड़ा हिस्सा धंसकर नदी में विलीन हो चुका है.

आस्था के पर्व पर मंडराया संकट; संवेदक और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

स्थानीय पंचायत वासियों का कहना है कि लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान इस घाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान भास्कर को अर्घ्य देने जुटते हैं. घाट के धंस जाने के कारण अब यहां पैर रखना भी खतरों से खाली नहीं रह गया है. यदि निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों और सही अनुपात में बालू-सीमेंट के मिश्रण से हुआ होता, तो यह मजबूत संरचना बाढ़ के थपेड़ों को झेल जाती. ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि जांच टीम गठित कर दोषी संवेदक (ठेकेदार) और कार्यपालक अभियंता को चिह्नित कर उनसे राशि की वसूली की जाए.

Chhath Ghat Damage: प्रशासनिक जवाबदेही पर लटकी तलवार

इस घटना के बाद अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह उठ रहा है कि सरकारी खजाने से स्वीकृत लाखों रुपये की सार्वजनिक संपत्तियां जब अधिकारियों की नाक के नीचे दो साल भी नहीं टिक पातीं, तो इसकी सीधी जवाबदेही किसकी तय होगी? फिलहाल पूरे प्रखंड क्षेत्र में इस ध्वस्त घाट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं और स्थानीय लोग जिला प्रशासन की त्वरित जांच और दंडात्मक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.

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