पहली बारिश में ही ‘फेल’ हुए रेलवे के अंडरपास! गलगलिया–अररिया रेल खंड पर जलभराव से थमी रफ्तार
Araria Railway Underpass: गलगलिया–अररिया नई रेल लाइन परियोजना के तहत बने अंडरपास मानसून की पहली ही बौछार में टापू बन गए हैं. ठाकुरगंज से पोवाखाली के बीच कई फीट पानी जमा होने से राहगीरों की जान आफत में फंसी, कटिहार डीआरएम से शिकायत.
मुख्य बातें:
Araria Railway Underpass: अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित रेलवे अंडरपास (सीमित ऊंचाई के सब-वे) मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश में पूरी तरह ‘फेल’ साबित हो गए हैं. ठाकुरगंज से पोवाखाली के बीच स्थित अधिकांश अंडरपासों में तकनीकी खामियों के कारण भारी जलभराव हो गया है. कई प्रमुख स्थानों पर तीन से चार फीट तक पानी जमा हो जाने से अंडरपास की सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं. इस जलमग्न स्थिति के कारण ग्रामीण इलाकों की एक बड़ी आबादी का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है और लोगों की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
राहगीर और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालने को मजबूर
- आवागमन प्रभावित: इस जलभराव के कारण सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, क्षेत्र के किसानों, आपातकालीन मरीजों और रोजाना बाजार आने-जाने वाले कामकाजी लोगों को उठानी पड़ रही है.
- हादसों को आमंत्रण: दोपहिया, तिपहिया (ऑटो) और छोटे चारपहिया वाहनों के इंजन गहरे पानी में बंद हो रहे हैं. लोग जान जोखिम में डालकर इन अंडरपासों को पार कर रहे हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़ी अप्रिय घटना या डूबने से हादसे की आशंका बनी हुई है.
- जल निकासी की कमी: स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के समय रेलवे के इंजीनियरों ने भौगोलिक स्थिति का सही आकलन नहीं किया, जिसके कारण आस-पास के खेतों का पानी भी अंडरपास में ही आकर जमा हो रहा है.
एआईएमआईएम नेता गुलाम हसनेन ने कटिहार डीआरएम को भेजा आवेदन
मामले की गंभीरता को देखते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के स्थानीय नेता गुलाम हसनेन ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के कटिहार रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को एक आधिकारिक लिखित आवेदन भेजा है. उन्होंने सीधे तौर पर रेलवे की निर्माण विंग और संवेदक (ठेकेदार) पर लापरवाही का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि अंडरपास निर्माण के दौरान किसी भी वैज्ञानिक या स्थाई ड्रेनेज (जलनिकासी) प्रणाली का विकास नहीं किया गया, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और तकनीकी विफलता को दर्शाता है.
Araria Railway Underpass: जनहित में आवेदन के जरिए उठाई गई मुख्य मांगें
- तत्काल राहत: जलमग्न हो चुके सभी अंडरपासों में अविलंब हाई-पावर पंप लगाकर जमे हुए पानी की निकासी कराई जाए.
- तकनीकी ऑडिट: रेल खंड के सभी सब-वे का वरिष्ठ इंजीनियरों की टीम से तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और पानी रोकने के लिए कंक्रीट रिटेनिंग वॉल बनाई जाए.
- सुरक्षा उपाय: मानसून अवधि के दौरान गहरे पानी वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और रात के समय पर्याप्त प्रकाश (लाइटिंग) की व्यवस्था सुनिश्चित हो.
- जवाबदेही तय हो: घटिया डिजाइन पास करने वाली निर्माण एजेंसी और संबंधित रेल अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर विभागीय कार्रवाई की जाए.
प्रखंड के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि मानसून ने अभी सिर्फ दस्तक दी है और आगे की स्थिति और भयावह हो सकती है. अब देखना यह है कि कटिहार रेल मंडल इस तकनीकी गड़बड़ी को सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर कदम उठाता है या किसी बड़े हादसे के बाद ही रेलवे प्रशासन की नींद खुलेगी.
