महानंदा पर पीपा पुल की मांग तेज, चचरी पुल से सफर करने की मजबूरी
महानंदा पर पीपा पुल की मांग तेज, चचरी पुल से सफर करने की मजबूरी
– रेलवे ब्रिज के समीप अस्थायी बांस पुल से रोजाना सैकड़ों लोगों का आवागमन
– कदवा-आजमनगर की नौ पंचायतों को मिलेगा सीधा लाभबारसोईबारसोई सद्भावना मैदान के समीप महानंदा नदी पर रेलवे पुल के पास पीपा पुल निर्माण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है. पुल के अभाव में स्थानीय लोग अवैध रूप से बने बांस के चचरी पुल के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं. इस जोखिम भरे रास्ते से प्रतिदिन टोटो, बाइक और पैदल यात्री जान हथेली पर रखकर आवागमन करते हैं. लोगों के अनुसार कदवा व आजमनगर प्रखंड की करीब नौ पंचायतों के हजारों लोगों के लिए यह मार्ग बारसोई जंक्शन रेलवे स्टेशन पहुंचने का सबसे नजदीकी रास्ता है. मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों को पकड़ने के लिए बड़ी संख्या में यात्री इसी मार्ग का उपयोग करते हैं. निबंधन कार्यालय समेत अन्य सरकारी कार्यों के लिए आने-जाने वाले लोग भी समय और दूरी बचाने के उद्देश्य से इसी रास्ते को चुनते हैं. हालांकि रेलवे पुल के नीचे अथवा उसके निकट बने बांस के अस्थायी चचरी पुल से आवागमन बेहद खतरनाक बना हुआ है.
बरसात में स्थिति और भी हो जाती है गंभीर
बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. जदयू नेता सह सूरजापुर जनक्रांति मोर्चा बिहार के संयोजक ख्वाजा शाहिद ने राज्य सरकार एवं संबंधित विभागों से अविलंब यहां पीपा पुल निर्माण कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि रेलवे पुल के समीप या कुछ दूरी पर योजनाबद्ध तरीके से पीपा पुल का निर्माण कराया जाय. लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके. उन्होंने कहा कि पीपा पुल बनने से नगर पंचायत बारसोई, कदवा एवं आजमनगर प्रखंड के आसपास की पंचायतों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा. साथ ही रेलवे स्टेशन, बाजार और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना आसान होगा तथा वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा.
