अमदाबाद में गंगा व महानंदा के कटाव पर कब लगेगा अंकुश? 40 साल में एक दर्जन गांव और 11 स्कूल नदी में विलीन

Ganga Mahananda River Erosion: कटिहार के अमदाबाद प्रखंड में गंगा और महानंदा नदी का कटाव पिछले चार दशकों से तबाही का सबब बना हुआ है. अब तक एक दर्जन से अधिक गांवों का अस्तित्व पूरी तरह मिट चुका है और 11 सरकारी स्कूल नदी के गर्भ में समा चुके हैं, जिससे सैकड़ों परिवार पड़ोसी राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं.

By Divyanshu Prashant | July 5, 2026 11:10 AM

कटिहार के अमदाबाद से मनोज कुमार की रिपोर्ट

Ganga Mahananda River Erosion: कटिहार जिले का अमदाबाद प्रखंड पिछले 40 वर्षों से प्रकृति और प्रशासनिक विफलता की दोहरी मार झेल रहा है. यहां से होकर गुजरने वाली गंगा और महानंदा नदी का उग्र कटाव व बाढ़ स्थानीय आबादी के लिए एक स्थाई अभिशाप बन चुके हैं. चार दशकों के इस लंबे कालखंड में एक बड़ी आबादी न सिर्फ अपनी पैतृक जमीन से विस्थापित हुई है, बल्कि कई समृद्ध गांवों का भूगोल ही हमेशा के लिए मिट गया है. हर साल मानसून के दस्तक देते ही नदी का जलस्तर बढ़ता है और पानी की तेज धार तटवर्ती इलाकों को लीलने लगती है.

चार दशकों की तबाही: एक नजर में देखिए कब और कहां हुआ कटाव

नदियों ने दशक दर दशक जिस तरह से अमदाबाद प्रखंड के गांवों को अपने आगोश में लिया है, का पूरा क्रोनोलॉजिकल विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

समयावधि (दशक)नदी के गर्भ में समाए मुख्य गांव और टोले
वर्ष 1980 से 1990नवरसिया, रामायण पुर, कुकड़िया दियारा, गुआगाछी और टोपरा गांव (भीषणतम कटाव का दौर).
वर्ष 1990 से 2000महानंदा नदी के प्रकोप से बालमुकुंद टोला, छबिलाल टोला, बहरसाल और दिल्ली दीवानगंज विलीन.
वर्ष 2000 से 2010कोशी जल्ली टोला, जमुनतल्ला और गोलाघाट का अस्तित्व गंगा नदी ने मिटाया.
वर्ष 2010 से 2020खट्टी किशनपुर, खट्टी टोला, धन्नी टोला, बंकू टोला और श्रीराम पुर गांव जमींदोज हुए.

शिक्षा व्यवस्था पर वज्रपात: नदी में विलीन हो गए ये 11 सरकारी विद्यालय

कटाव की सबसे दर्दनाक मार बच्चों की शिक्षा पर पड़ी है. क्षेत्र के 11 प्रमुख सरकारी स्कूल नदियों की तेज धारा में बह गए, जिन्हें बाद में अन्यत्र शिफ्ट किया गया या दूसरे स्कूलों में मर्ज (विलय) करना पड़ा:

  • मध्य विद्यालय: म.वि. नवरसिया और म.वि. खट्टी टोला.
  • उत्क्रमित मध्य विद्यालय (UMV): यू.एम.वी. टोपरा, यू.एम.वी. धन्नी टोला, यू.एम.वी. बंकू टोला और यू.एम.वी. बबला बन्ना.
  • प्राथमिक विद्यालय (PV): प्रा.वि. कुकड़िया, प्रा.वि. खट्टी किशनपुर, प्रा.वि. खट्टी पार दियारा, प्रा.वि. युसूफ टोला और प्रा.वि. बबला बन्ना उत्तर भाग.

Ganga Mahananda River Erosion: करोड़ों का बजट भी साबित हुआ बौना; पड़ोसी राज्यों में पलायन को मजबूर ग्रामीण

नदियों की धारा मोड़ने और किनारों को सुरक्षित करने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा अब तक करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके हैं, लेकिन धरातल पर नतीजे ढाक के तीन पात रहे हैं.

पूर्व में गंगा नदी के कटाव को थामने के लिए हरदेव टोला से पार दियारा तक 67 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बोल्डर क्रेटिंग का कार्य कराया गया था. इसके बाद मेघु टोला से बबला बन्ना तक 14 करोड़ रुपये की लागत से बल्ला पाइलिंग, गेबियन और जियोबैग क्रेटिंग कराई गई. वहीं, बीते वर्ष भी 31 करोड़ रुपये की लागत राशि से नए कटावनिरोधात्मक कार्य कराए गए. इन तात्कालिक उपायों से कुछ समय के लिए राहत तो मिलती है, लेकिन बाढ़ के दिनों में यह पूरी संरचना नदी के तेज बहाव में ढह जाती है.

वर्तमान में हरदेव टोला, मेघु टोला, सूबेदार टोला, कीर्ति टोला, युसूफ टोला और बबला बन्ना गांव के बचे हुए हिस्से पर आंशिक रूप से संकट का साया मंडरा रहा है. मेघु टोला व बबला बन्ना के बीच का इलाका सबसे संवेदनशील जोन बना हुआ है. अपनी आंखों के सामने आशियाना उजड़ता देख कीर्ति टोला, सूबेदार टोला सहित अन्य गांवों के सैकड़ों परिवार विस्थापित होकर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और झारखंड में शरण लेने को मजबूर हो चुके हैं. ग्रामीणों ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि यहां कागजी खानापूर्ति बंद कर जल संसाधन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा कोई ठोस और स्थाई वैज्ञानिक समाधान निकाला जाए ताकि अमदाबाद का अस्तित्व बचाया जा सके.

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