बरहट. प्रखंड क्षेत्र में बच्चों के पोषण और शिक्षा की रीढ़ मानी जाने वाली आंगनबाड़ी व्यवस्था बदहाली के पायदान पर खड़ी है. एक से छह वर्ष तक के बच्चों को पोषण व प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने के लिए स्वीकृत 106 आंगनबाड़ी केंद्र कागजों पर तो संचालित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है. आधा दर्जन से अधिक केंद्रों पर सेविकाओं के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद अब तक बहाली नहीं हो सकी है. इस कारण पड़ोसी केंद्रों की सेविकाओं को अतिरिक्त प्रभार देकर किसी तरह संचालन कराया जा रहा है. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि 47 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपना सरकारी भवन ही नहीं है. ऐसे केंद्र निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषाहार व मध्याह्न भोजन का मेनू चार्ट सूची की पेंटिंग नहीं है. ऐसे में बच्चों को न तो पोषण संबंधी सही जानकारी मिल पा रही है और न ही निर्धारित मात्रा में पोषाहार. कई केंद्रों पर बच्चों को पानी पीने के लिए घर जाना पड़ता है या फिर दूषित पानी से प्यास बुझानी पड़ती है.