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Home बिहार जमुई बुनियादी सुविधाओं को तरसते बरहट के आंगनबाड़ी, कहीं शौचालय नहीं ,तो कहीं पानी की कमी, कहीं सेविका नहीं तो कहीं भवन का अभाव

बुनियादी सुविधाओं को तरसते बरहट के आंगनबाड़ी, कहीं शौचालय नहीं ,तो कहीं पानी की कमी, कहीं सेविका नहीं तो कहीं भवन का अभाव

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बुनियादी सुविधाओं को तरसते बरहट के आंगनबाड़ी, कहीं शौचालय नहीं ,तो कहीं पानी की कमी, कहीं सेविका नहीं तो कहीं भवन का अभाव

बरहट. प्रखंड क्षेत्र में बच्चों के पोषण और शिक्षा की रीढ़ मानी जाने वाली आंगनबाड़ी व्यवस्था बदहाली के पायदान पर खड़ी है. एक से छह वर्ष तक के बच्चों को पोषण व प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने के लिए स्वीकृत 106 आंगनबाड़ी केंद्र कागजों पर तो संचालित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है. आधा दर्जन से अधिक केंद्रों पर सेविकाओं के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद अब तक बहाली नहीं हो सकी है. इस कारण पड़ोसी केंद्रों की सेविकाओं को अतिरिक्त प्रभार देकर किसी तरह संचालन कराया जा रहा है. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि 47 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपना सरकारी भवन ही नहीं है. ऐसे केंद्र निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषाहार व मध्याह्न भोजन का मेनू चार्ट सूची की पेंटिंग नहीं है. ऐसे में बच्चों को न तो पोषण संबंधी सही जानकारी मिल पा रही है और न ही निर्धारित मात्रा में पोषाहार. कई केंद्रों पर बच्चों को पानी पीने के लिए घर जाना पड़ता है या फिर दूषित पानी से प्यास बुझानी पड़ती है.

सिर्फ 10 केंद्रों पर शौचालय-पानी की व्यवस्था

नाम नहीं छापने की शर्त पर विभागीय कर्मी बताते हैं कि कई बार बैठकों में शौचालय व पेयजल व्यवस्था की मांग उठाई गई. लेकिन अब तक एक भी नए केंद्र पर सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई. विभागीय रिकॉर्ड में सभी केंद्रों पर शौचालय निर्माण दिखाया जा रहा है जबकि हकीकत में महज 8 से 10 केंद्रों पर ही शौचालय व पानी की व्यवस्था है.

निजी भवनों में सेविकाओं की मनमानी

सूत्रों के अनुसार निजी भवनों में संचालित केंद्रों पर सेविकाओं की मनमानी अधिक देखने को मिलती है. ताजा मामला आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 50 पतौना का है जहां सेविका अपने घर के बरामदे में केंद्र चला रही है. संचालन में एफआरएस में नहीं होने पर विभाग ने बीते माह का पोषाहार आवंटन रोक दिया है.

अतिरिक्त प्रभार से चल रहे कई केंद्र

सेविकाओं की कमी के चलते कई केंद्रों को एक ही सेविका के भरोसे चलाया जा रहा है. जैसे केंद्र संख्या 11 तोमर टोला मुसहरी को केंद्र संख्या 12 गिद्दा टेंगहरा की सेविका, केंद्र संख्या 18 गर्ल्स स्कूल ताती टोला की सेविका को केंद्र संख्या 15 चौहान सिंगर टोला मलयपुर तथा इसी तरह अन्य केंद्रों को अतिरिक्त प्रभार देकर संचालित किया जा रहा है. अब यहां सोने वाली बात है कि एक सेविका दो केंद्र को बच्चों को एक साथ कैसे पढ़ा सकती है.

सामुदायिक भवन पर ताला, बच्चों की पढ़ाई ठप

पाड़ों पंचायत के वार्ड संख्या 9 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 22 वर्षों से सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा था. गांव के कुछ दबंगों द्वारा भवन में ताला जड़ देने से केंद्र बंद हो गया है. इस संबंध में सेविका ने विभाग को लिखित शिकायत भी दी है.कुल मिलाकर बरहट प्रखंड में आंगनबाड़ी व्यवस्था बदहाल स्थिति में है और जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है.

कहते हैं पदाधिकारी

सीडीपीओ प्रियंबदा कुमारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर पीएचईडी विभाग के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजना स्वीकृत है, लेकिन संबंधित एजेंसियों द्वारा कई केंद्रों तक अब तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जा सकी है. वहीं जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है. इसकी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है ताकि आगे आवश्यक कार्रवाई की जा सके.

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