बेतिया से रवि रंक की रिपोर्ट
School Dropout Mission: जिलाभर के स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन और सरकारी विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ी पहल की है. विभाग के नए आदेश के तहत शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियां बढ़ा दी गई हैं. अब इनका मुख्य कार्य पोषक क्षेत्र के 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों को विद्यालय से जोड़ना होगा, जो अब तक स्कूल नहीं पहुंच पाए हैं या बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके हैं.
टोले-टोले घूमेंगे स्वयंसेवक, बनाएंगे बाल पंजी
नव पदस्थापित जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार ने विभागीय आदेश के आलोक में बताया कि शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज प्रतिदिन अपने-अपने टोले में भ्रमण करेंगे. वे बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करेंगे तथा उन्हें सुरक्षित ढंग से स्कूल तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे. वे विद्यालय के प्रधानाध्यापक के साथ समन्वय स्थापित कर नए बच्चों का नामांकन, नियमित उपस्थिति और ड्रॉपआउट बच्चों की पुनर्वापसी सुनिश्चित करेंगे. नई व्यवस्था के तहत वे बाल पंजी और माता पंजी तैयार करेंगे तथा अशिक्षित महिलाओं को साक्षर बनाएंगे.
चेतना सत्र में भाग लेना और पढ़ाना होगा अनिवार्य
अपर शिक्षा सचिव सह जन शिक्षा निदेशक विजय कुमार के स्तर से जारी आदेश के अनुसार, ये स्वयंसेवक प्रतिदिन विद्यालय के चेतना सत्र में भाग लेंगे. इसके साथ ही वे कम से कम दो घंटे तक बच्चों के साथ शैक्षणिक गतिविधियों में सहयोग देंगे. आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक की कमी वाले विद्यालयों में एक-दो कक्षाओं के संचालन में भी हाथ बटाएंगे.
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
समग्र, पीएम पोषण योजना की डीपीओ कुमकुम पाठक ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने के लिए यह निर्देश जारी हुआ है. कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. विभागीय निरीक्षी अधिकारियों को शिक्षा सेवकों के कार्यों का नियमित भौतिक निरीक्षण करने तथा शिथिलता पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.
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