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Home बिहार किशनगंज पानीटंकी बॉर्डर पर मानव तस्करी की बड़ी साजिश नाकाम, 15 वर्षीय नेपाली किशोरी का रेस्क्यू

पानीटंकी बॉर्डर पर मानव तस्करी की बड़ी साजिश नाकाम, 15 वर्षीय नेपाली किशोरी का रेस्क्यू

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पानीटंकी बॉर्डर पर मानव तस्करी की बड़ी साजिश नाकाम, 15 वर्षीय नेपाली किशोरी का रेस्क्यू
नेपाली किशोरी

ठाकुरगंज से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Human Trafficking: बिहार के किशनगंज जिले की गलगलिया सीमा से सटे भारत-नेपाल के पानीटंकी अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने अदम्य सतर्कता का परिचय देते हुए मानव तस्करी (Human Trafficking) के एक बड़े और अंतरराष्ट्रीय रैकेट की साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है. एसएसबी के विंग ने सीमा पर चलाए जा रहे नियमित सघन जांच अभियान के दौरान एक 15 वर्षीय नेपाली किशोरी को संदिग्ध परिस्थितियों में भारतीय सीमा में प्रवेश कराए जाने के दौरान रेस्क्यू किया. सुरक्षा बलों की इस त्वरित कार्रवाई से सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय मानव तस्करों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है.

गैरेज में हुई दोस्ती, फिर दिखाया सुनहरे भविष्य का फर्जी सपना

इस संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन और आरोपी की कार्यशैली से जुड़े मुख्य तथ्य निम्नलिखित हैं:

  • उत्तर दिनाजपुर का आरोपी गिरफ्तार: पकड़ी गई किशोरी के साथ पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले का एक शातिर युवक मौजूद था, जिसे एसएसबी ने तुरंत हिरासत में ले लिया.
  • दो दिन पहले बुना जाल: प्रारंभिक पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा हुआ कि आरोपी की मुलाकात किशोरी से घटना से महज दो दिन पहले नेपाल में उसके घर के पास स्थित एक ऑटो गैरेज में हुई थी, जहां आरोपी काम करता था.
  • आर्थिक मजबूरी का फायदा: आरोपी ने किशोरी से नजदीकियां बढ़ाईं और भारत में बेहतर जीवन, सम्मानजनक रोजगार और मोटी कमाई का झांसा देकर उसे अपने साथ चलने के लिए राजी कर लिया.

पारिवारिक संरक्षण के अभाव ने मासूम को बनाया आसान शिकार

पीड़ित किशोरी की पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद दर्दनाक रही है, जिसका फायदा तस्करों ने उठाया:

घटनाक्रम/पृष्ठभूमिकिशोरी के जीवन की दर्दनाक सच्चाई
बचपन का सायाबचपन में ही किशोरी की माता का असमय निधन हो गया था.
पिता का पलायनलगभग 10 वर्ष पूर्व पिता अपनी दूसरी पत्नी के साथ रोजगार के लिए विदेश चले गए और नाता तोड़ लिया.
आश्रयवह नेपाल में अपनी एक सहेली के गरीब परिवार के साथ रहकर जैसे-तैसे जीवनयापन कर रही थी.
बॉर्डर पर खुलासाबॉर्डर पार करते समय एसएसबी के जवानों को दोनों के बयानों में विरोधाभास मिला, जिसके बाद तस्कर पकड़ा गया.

मनोवैज्ञानिक सहयोग और काउंसलिंग; ‘शक्ति वाहिनी’ संस्था ने बढ़ाया हाथ

एसएसबी ने रेस्क्यू के तुरंत बाद मानवीय संवेदनाओं का ध्यान रखते हुए किशोरी को सुरक्षित संरक्षण में लिया. उसे भरपेट भोजन, आवश्यक प्राथमिक चिकित्सकीय सहायता और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग उपलब्ध कराई गई है. इसके साथ ही नेपाल की संबंधित रेस्क्यू एजेंसियों और उसके स्थानीय संरक्षकों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि उसे कानूनी कागजी कार्रवाई के बाद सुरक्षित वतन वापस भेजा जा सके.

सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाली प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था ‘शक्ति वाहिनी’ ने भी इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अपना महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग दिया. संस्था के विशेषज्ञों के मुताबिक, तस्कर अक्सर भारत-नेपाल की खुली सीमा का गलत फायदा उठाते हैं और मासूमों को घरेलू दासता या अन्य अनैतिक कार्यों के दलदल में धकेल देते हैं.

Human Trafficking: रणनीतिक रूप से संवेदनशील है गलगलिया और सिलीगुड़ी कॉरिडोर

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किशनगंज की गलगलिया सीमा, पानीटंकी, काकरभिट्टा और सिलीगुड़ी का पूरा इलाका ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर के करीब होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है. यहाँ रोजाना हजारों लोगों की सीमा पार आवाजाही होती है.

मानव तस्कर अब सोशल मीडिया संपर्क, झूठे प्रेमजाल और फर्जी नौकरी के विज्ञापनों को अपना मुख्य हथियार बना रहे हैं. यदि एसएसबी के जवान समय पर सतर्कता नहीं दिखाते, तो यह किशोरी भी किसी बड़े संगठित नेटवर्क की भेंट चढ़ जाती. सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या 112 हेल्पलाइन पर दें.

गिरफ्तार किए गए आरोपी को अग्रिम विधिक कार्रवाई और आर्म्स/ह्यूमन ट्रैफिकिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करने के लिए स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है, जिससे आगे की पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों के नामों का खुलासा होने की उम्मीद है.

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