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Home बिहार अररिया मौत का कुआं बना कजरा नदी पुल, टूटी रेलिंग से नदी में गिर चुके हैं आधा दर्जन ट्रक

मौत का कुआं बना कजरा नदी पुल, टूटी रेलिंग से नदी में गिर चुके हैं आधा दर्जन ट्रक

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मौत का कुआं बना कजरा नदी पुल, टूटी रेलिंग से नदी में गिर चुके हैं आधा दर्जन ट्रक
टूटा हुआ रेलिंग
अररिया के नरपतगंज से संजीव कुमार यादव की रिपोर्ट

Kajra River Bridge: बिहार के सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर सफर करना अब जानलेवा साबित होने लगा है. ताजा और बेहद चिंताजनक मामला अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत फारबिसगंज मुख्य मार्ग से सामने आया है. यहाँ नरपतगंज-फारबिसगंज एनएच के पलासी स्थित कजरा नदी पर बने पुल की सुरक्षा रेलिंग पिछले कई महीनों से पूरी तरह ध्वस्त पड़ी है. व्यस्त और हाई-स्पीड हाईवे होने के कारण यहाँ चौबीसों घंटे छोटी-बड़ी गाड़ियों का भारी दबाव रहता है. ऐसे में पुल की रेलिंग का न होना सीधे तौर पर पल-पल दस्तक देती मौत को आमंत्रण दे रहा है. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस डेंजर पॉइंट पर लगातार हो रहे हादसों के बावजूद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है और किसी बड़ी मानव त्रासदी का इंतजार कर रहा है.

अब तक आधा दर्जन से अधिक ट्रक नदी में मार चुके हैं पलटी, संकरा हुआ मार्ग

  • महीनों से टूटा सुरक्षा कवच: नेशनल हाईवे के इस मुख्य पुल पर लगी कंक्रीट और लोहे की मजबूत गार्ड रेलिंग (Safety Railing) महीनों पहले एक हादसे में टूट गई थी. तब से लेकर आज तक इस टूटे हुए हिस्से को खुला छोड़ दिया गया है, जिससे रात के अंधेरे या कोहरे के समय चालकों को पुल के अंत का अंदाजा नहीं मिल पाता.
  • हादसों का डरावना इतिहास: स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस टूटे हुए ट्रैक के कारण अब तक आधा दर्जन (6 से अधिक) भारी मालवाहक ट्रक अनियंत्रित होकर सीधे कजरा नदी के गहरे पानी में समा चुके हैं. इन हादसों में कई चालक और खलासी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं और लाखों की संपत्ति का नुकसान हो चुका है.

विभाग की संवेदनहीनता पर भड़के ग्रामीण; उग्र आंदोलन की चेतावनी

जनता का फूटा आक्रोश: इस जानलेवा लापरवाही को लेकर पलासी और आस-पास के ग्रामीणों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है. ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार विभागीय कनीय अभियंताओं और टोल प्लाजा के प्रबंधकों को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं. हर बार केवल आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर कजरा नदी पुल की मरम्मत को लेकर एक ईंट तक नहीं जोड़ी गई है. ग्रामीणों ने कड़े लहजे में कहा है कि अगर जल्द ही विभाग ने इस पुल की रेलिंग को दुरुस्त नहीं कराया, तो वे हाईवे को पूरी तरह जाम कर एनएचएआई के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने के लिए विवश होंगे.

कभी भी घट सकती है बड़ी घटना, तत्काल बैरिकेडिंग की मांग

तपती गर्मी और उमस के इस सीजन में हाईवे पर चलने वाले वाहन चालकों को थकान के कारण नींद आने या संतुलन खोने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है. ऐसी स्थिति में कजरा नदी पुल का यह खुला हुआ हिस्सा किसी बड़े बस हादसे या भीषण जानमाल की क्षति का कारण बन सकता है. स्थानीय सजग नागरिकों ने अररिया के जिला पदाधिकारी (DM) से इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है. लोगों की मांग है कि जब तक पुल की स्थाई मरम्मत और रेलिंग की ढलाई का काम शुरू नहीं होता, तब तक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एनएचएआई द्वारा वहां रिफ्लेक्टर युक्त ड्रम, लोहे के क्रैश बैरियर या चमकीली रेडियम टेप की अस्थाई बैरिकेडिंग तुरंत लगाई जाए, ताकि रात के समय भारी वाहनों को समय रहते सचेत किया जा सके.

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