CM of Jammu and Kashmir : जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शोपियां में कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है, बल्कि पिछले 30-40 वर्षों से लगातार बना हुआ है. उन्होंने कहा कि पिछले साल पहलगाम (22 अप्रैल 2025) में हुई आतंकी घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में और तल्खी आई है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इसलिए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की जा रही है.
RSS का हवाला देकर उठाया सवाल
सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 13 जून 2026 को तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तान के साथ बातचीत (संवाद) और दोस्ताना रिश्तों के विकल्प खुले रखने की बात कही थी. उन्होंने मोदी सरकार तंज कसते हुए कहा कि जब RSS नेतृत्व यह बात करता है तो कोई विवाद नहीं होता, लेकिन जम्मू-कश्मीर के नेता यही बात कहें तो राजनीतिक हंगामा खड़ा हो जाता है.सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि शांति की मांग को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए.
पूर्व पीएम वाजपेयी की नीति का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन को याद करते हुए कहा कि “दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं.” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग चाहते हैं कि पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते बेहतर हों, ताकि सीमा पर रहने वाले लोगों को बार-बार तनाव और अनिश्चितता का सामना न करना पड़े.
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पुरानी घटनाओं से जुड़ा संदेश
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है जब पहलगाम हमले, सीमा पार गोलीबारी और कूटनीतिक तनाव को लेकर लगातार बहस चल रही है. इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं ने संवाद बहाल करने की वकालत की थी, जबकि केंद्र सरकार आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख पर जोर देती रही है. उमर ने कहा कि बातचीत और सुरक्षा, दोनों साथ-साथ चल सकते हैं और स्थायी शांति का रास्ता संवाद के जरिए ही निकलेगा.
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