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Home World US ग्रीन कार्ड के लिए अब केवल शादी काफी नहीं, नियम हुए सख्त, इन शर्तों पर मिलेगी परमानेंट रेसिडेंसी

US ग्रीन कार्ड के लिए अब केवल शादी काफी नहीं, नियम हुए सख्त, इन शर्तों पर मिलेगी परमानेंट रेसिडेंसी

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US ग्रीन कार्ड के लिए अब केवल शादी काफी नहीं, नियम हुए सख्त, इन शर्तों पर मिलेगी परमानेंट रेसिडेंसी
अब सिर्फ शादी से US ग्रीन कार्ड की गारंटी नहीं मिलेगी.

US Green Cards Through Marriage for American Citizenship: अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का सपना देखने वाले लाखों लोगों के लिए ग्रीन कार्ड एक अहम दस्तावेज है. इसे आधिकारिक तौर पर परमानेंट रेसिडेंट कार्ड कहा जाता है, किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और रोजगार करने का कानूनी अधिकार देता है. लंबे समय तक यह धारणा रही है कि किसी अमेरिकी नागरिक से शादी करना ग्रीन कार्ड पाने का सबसे आसान और भरोसेमंद रास्ता है. लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो गई है और सिर्फ शादी कर लेना अब ग्रीन कार्ड मिलने की गारंटी नहीं रह गया है.

ग्रीन कार्ड किसी प्रवासी को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का अधिकार देता है और यही आगे चलकर अमेरिकी नागरिकता का रास्ता भी खोलता है. हालांकि ग्रीन कार्ड धारकों को नागरिकों जैसे सभी अधिकार नहीं मिलते, फिर भी रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व जैसी कई अहम सुविधाओं के कारण यह दस्तावेज बेहद अहम माना जाता है. ग्रीन कार्ड धारकों को लॉफुल परमानेंट रेसिडेंट (LPR) कहा जाता है और वे तय शर्तें पूरी करने के बाद अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. आम तौर पर इसके लिए अमेरिका में कुछ वर्षों तक लगातार निवास करना और अच्छे नैतिक चरित्र को साबित करना जरूरी होता है. 

ग्रीन कार्ड में आवदनों के बाद बढ़ी जांच

अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा USICS के अनुसार, किसी अमेरिकी नागरिक से विवाह करने पर ग्रीन कार्ड मिलना लगभग तय होता है, क्योंकि वे तुरंत संबंधी की श्रेणी में आ जाते हैं. लेकिन इमिग्रेशन कानूनों के जानकारों के अनुसार, मौजूदा ट्रंप प्रशासन के दौरान शादी के आधार पर दाखिल किए जाने वाले ग्रीन कार्ड आवेदनों की बेहद कड़ी जांच की जा रही है. इस प्रक्रिया में यह देखा जा रहा है कि शादी वास्तव में पति-पत्नी के रूप में साथ जीवन बिताने की सच्ची मंशा से की गई है या केवल इमिग्रेशन लाभ हासिल करने के उद्देश्य से.

अगर दंपती साथ नहीं रहते, तो होगी मुश्किल

इमिग्रेशन वकील ब्रैड बर्नस्टीन का कहना है कि अगर पति-पत्नी एक साथ नहीं रहते, तो उनका ग्रीन कार्ड मामला शुरू से ही कमजोर हो जाता है. उनके मुताबिक, सिर्फ रिश्ते का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि साथ रहना सबसे अहम सबूत माना जाता है. इमिग्रेशन अधिकारी इस बात की जांच करते हैं कि दंपति रोजमर्रा की जिंदगी में एक ही घर में रहते हैं या नहीं.

बर्नस्टीन ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी इस बात से प्रभावित नहीं होते कि पति-पत्नी अलग-अलग क्यों रह रहे हैं, चाहे वजह नौकरी हो, पढ़ाई, आर्थिक स्थिति या सुविधा. अगर दंपती रोज एक ही घर में नहीं रहते, तो इमिग्रेशन विभाग शादी की प्रामाणिकता पर सवाल उठाना शुरू कर देता है. एक बार संदेह पैदा होने पर गहन जांच होती है, जो आवेदन खारिज होने तक पहुंच सकती है.

मंशा की भी होगी जांच

USCIS भी साफ तौर पर कहती है कि भले ही शादी कानूनी रूप से वैध हो, लेकिन अगर यह साबित हो जाए कि दोनों पक्षों की पति-पत्नी के रूप में साथ रहने की सच्ची मंशा नहीं थी और शादी केवल इमिग्रेशन कानूनों से बचने के लिए की गई थी, तो उसे बोना फाइड नहीं माना जाएगा और ग्रीन कार्ड आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है.

ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम को भी किया निलंबित

इसी बीच ट्रंप प्रशासन ने ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम को भी निलंबित कर दिया है. यह फैसला हाल की कुछ गंभीर घटनाओं के बाद लिया गया, जिनमें आरोप है कि संबंधित व्यक्ति अमेरिका में इसी कार्यक्रम के जरिये दाखिल हुआ था. अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह लॉटरी हर साल कम इमिग्रेशन दर वाले देशों के लोगों को लगभग 55,000 स्थायी निवास वीजा देती है. 

ट्रंप प्रशासन ने कुछ देशों के चिह्नित ग्रीन कार्ड धारकों की जांच की जा रही है. उनका मानना है कि इससे सुरक्षा और इमिग्रेशन कंट्रोल मजबूत होंगे. होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर DV1 प्रोग्राम को तुरंत रोका जा रहा है, ताकि भविष्य में इस कार्यक्रम के कारण किसी भी अमेरिकी को नुकसान न पहुंचे.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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