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Home World फ्रांस के बाद अब ब्रिटिश म्यूजियम में ‘डकैती’, 600 बेशकीमती सामान ले गए लुटेरे, भारत से था खास संबंध

फ्रांस के बाद अब ब्रिटिश म्यूजियम में ‘डकैती’, 600 बेशकीमती सामान ले गए लुटेरे, भारत से था खास संबंध

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फ्रांस के बाद अब ब्रिटिश म्यूजियम में ‘डकैती’, 600 बेशकीमती सामान ले गए लुटेरे, भारत से था खास संबंध
ब्रिस्टल म्यूजियम में चोरी.

UK Bristol Museum Theft: कुछ दिनों पहले फ्रांस के लूव्र म्यूजियम से बहुत बड़ी चोरी सामने आई थी. अब ब्रिटेन के ब्रिस्टल म्यूजियम से 600 से अधिक बहुमूल्य औपनिवेशिक और ऐतिहासिक कलाकृतियाँ चोरी हो जाने से वहां हड़कंप मचा हुआ है. चोरी की गई वस्तुओं में भारत, ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश कॉमनवेल्थ से जुड़े दुर्लभ अवशेष शामिल हैं. इनमें से कई प्राइसलेस कल्चरल इपॉर्टेंस रखते हैं. इन कलाकृतियों की चोरी को ब्रिटेन में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी म्यूजियम चोरी की वारदात माना जा रहा है. पुलिस के अनुसार यह घटना 25 सितंबर की रात 1 बजे से 2 बजे के बीच हुई, जब चार अज्ञात व्यक्ति ब्रिस्टल के उस वेयरहाउस में घुस गए जहाँ म्यूजियम का ब्रिटिश एम्पायर और कॉमनवेल्थ का विशाल संग्रह सुरक्षित रखा गया था. सुरक्षातंत्र को चकमा देकर चोरों ने बड़ी संख्या में वस्तुएँ उठाईं और चुपचाप फरार हो गए.

चोरी हुई वस्तुओं में कई बेहद दुर्लभ और बेशकीमती आइटम शामिल हैं. इनमें ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी की कमरपट्टी का प्लेट माउंट भी है, जिस पर कंपनी का ऐतिहासिक आदर्श वाक्य ‘Auspicio Regis et Senatus Angliae’ खुदा हुआ है. इसी तरह, हाथीदांत से तराशा गया एक सजावटी हाथी और सात सांपों के फन वाले डिजाइन वाले पत्थर के आधार पर स्थापित हाथीदांत बुद्ध भी चोरी हुई कलाकृतियों में शामिल हैं. यह बुद्ध प्रतिमा विशेष रूप से उल्लेखनीय बताई जा रही है. इसके अलावा 1838 का एक अमेरिकी ‘एमैंसिपेशन टोकन’ भी चोरी हो गया, जिसे दासप्रथा उन्मूलन के समर्थन में जारी किया गया था.

सांस्कृतिक विरासत को गहरी क्षति: जांच अधिकारी

इनके अतिरिक्त चोर सैन्य इतिहास से जुड़ी वस्तुएँ, आभूषण, चांदी के सामान, कांस्य मूर्तियाँ और कई कीमती भूवैज्ञानिक नमूने लेकर फरार हो गए. पुलिस ने जांच तेज कर दी है और गुरुवार को चार संदिग्ध पुरुषों की सीसीटीवी तस्वीरें जारी करते हुए जनता से जानकारी देने की अपील की है. केस अधिकारी डीसी डैन बर्गन ने कहा- ये चोरी हुई वस्तुएँ उस महत्वपूर्ण संग्रह का हिस्सा थीं जो ब्रिटेन के इतिहास के एक अहम अध्याय को समझने में मदद करती हैं. इस नुकसान ने न केवल संग्रहालय को, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी गहरी क्षति पहुंचाई है.

भारत से संबंधित और क्या-क्या था?

ब्रिस्टल म्यूजियम के ब्रिटिश एम्पायर और कॉमनवेल्थ संग्रह में भारत और अन्य उपनिवेशों से जुड़ी अनेक दुर्लभ सामग्री शामिल है. इनमें 1903 के दिल्ली दरबार का प्रसिद्ध चित्र भी है, जिसे किंग एडवर्ड सप्तम को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में बनाया गया था. इसके अलावा ब्रिटिश सैनिक जोसेफ स्टीफेंस द्वारा उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर तैनाती के दौरान लिखे गए 250 से अधिक पत्र और मुंबई में जन्मे कलाकार विक्टर वीवर्स द्वारा 1930 के दशक में इंडियन रेलवे के लिए बनाए गए फोटोग्राफ भी इस संग्रह में हैं. PTI के अनुसार, चोरी हुई वस्तुओं में हाथीदांत का बना एक बुद्ध प्रतिमा और ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी की कमरबंद की बकल भी शामिल है. कई कलाकृतियाँ दान में मिली थीं और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थीं. 

पुलिस दो महीने बाद नींद से जागी!

पुलिस अब इन अमूल्य वस्तुओं की बरामदगी में जुटी है, लेकिन इतनी बड़ी चोरी ने म्यूज़ियम सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं. डिटेक्टिव कॉन्स्टेबल डैन बर्गन ने कहा कि यह नुकसान शहर के लिए गहरा आघात है. उन्होंने बताया कि अब तक की जांच में व्यापक सीसीटीवी समीक्षा, फोरेंसिक जांच और पीड़ितों के साथ लगातार संवाद शामिल रहा है. हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पुलिस ने चोरी की घटना के दो महीने से अधिक समय बाद सार्वजनिक अपील क्यों जारी की. जांच संदिग्धों या मामले से संबंधित किसी जानकारी के लिए अधिकारी लोगों से अपील कर रहे हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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