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Home World UAE ने यमन से जाते-जाते सऊदी अरब के लिए खड़ी की मुश्किल, STC ने ‘स्वतंत्र’ दक्षिणी क्षेत्र के लिए घोषित किया संविधान

UAE ने यमन से जाते-जाते सऊदी अरब के लिए खड़ी की मुश्किल, STC ने ‘स्वतंत्र’ दक्षिणी क्षेत्र के लिए घोषित किया संविधान

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UAE ने यमन से जाते-जाते सऊदी अरब के लिए खड़ी की मुश्किल, STC ने ‘स्वतंत्र’ दक्षिणी क्षेत्र के लिए घोषित किया संविधान
यमन के अलगाववादियों ने ‘स्वतंत्र’ दक्षिणी क्षेत्र के लिए संविधान की घोषणा की.

UAE backed STC in Yemen announced Constitution: यमन के दक्षिणी अलगाववादी आंदोलन ने उत्तर यमन से अलग होकर स्वतंत्र देश बनाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने घोषणा की है कि वह दो साल की संक्रमणकालीन अवधि के बाद स्वतंत्रता के लिए जनमत संग्रह कराएगी. इस दौरान दक्षिण और उत्तर यमन के पक्षों के बीच संवाद कराने की अपील भी की गई है. STC ने दक्षिण में एक “स्वतंत्र राष्ट्र” के लिए संविधान की घोषणा करते हुए अन्य यमनी गुटों से इसे स्वीकार करने की अपील की है. संगठन का कहना है कि यदि बातचीत विफल रहती है या दक्षिण पर कोई सैन्य हमला होता है, तो वह तुरंत स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा कर देगा. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह कदम व्यावहारिक रूप से लागू होगा या केवल प्रतीकात्मक रहेगा.

यह घोषणा ऐसे समय आई है जब सऊदी अरब समर्थित बल, हाल ही में STC के कब्जे में गए इलाकों को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहे हैं. खास तौर पर दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला और हदरामौत में हमलों के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं. इन इलाकों में पहले यूएई के सैनिक सक्रिय थे, लेकिन मुकल्ला में हमले के बाद सऊदी अरब ने उन्हें 24 घंटे के भीतर बाहर निकलने का निर्देश दिया. इसी बीच यूएई ने दावा किया है कि उसने यमन से अपने सभी सैनिकों की पूरी तरह वापसी कर ली है. यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सैनिकों और सैन्य उपकरणों की संख्या को लेकर कोई विवरण नहीं दिया.

यूएई ने वापस बुलाए अपने सैनिक

इसी बीच, संयुक्त अरब अमीरात ने शनिवार तड़के घोषणा की कि उसने यमन से अपने सभी सैनिकों को पूरी तरह से वापस बुला लिया है. संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार सुबह घोषणा की कि यमन से उसके सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. मंत्रालय ने स्थानांतरित किए गए सैनिकों और उपकरणों की संख्या के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी. इससे पहले, एसटीसी से जुड़े लड़ाकों ने सऊदी समर्थित बलों से दक्षिण के दो प्रांतों का नियंत्रण पिछले महीने अपने हाथ में ले लिया था और दक्षिण के प्रमुख शहर अदन में राष्ट्रपति भवन पर भी कब्जा कर लिया था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के सदस्य सऊदी अरब की राजधानी रियाद भाग गए.

अल-खशाआ कैंप में मारे गए 20 लड़ाके

तनाव के बीच शुक्रवार को सऊदी अरब की सीमा से सटे हदरमौत प्रांत में हिंसक झड़पें हुईं. यहां सऊदी समर्थित गवर्नर के प्रति वफादार बलों और STC के लड़ाकों के बीच संघर्ष हुआ. STC ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने सीमा के पास उसके ठिकानों पर हवाई हमले किए. संगठन के अनुसार, अल-खशाआ इलाके में एक कैंप पर किए गए हवाई हमलों में कम से कम 20 STC लड़ाके मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए. 

सऊदी अरब ने सभी पक्षों को एक मंच पर आने की अपील की

हदरमौत के गवर्नर सालेम अल-खानबाशी ने कहा कि STC से सैन्य ठिकाने वापस लेने की कार्रवाई किसी युद्ध या उकसावे के इरादे से नहीं की जा रही है. उनके मुताबिक, यह कदम दक्षिणी प्रांत में ठिकानों में सुरक्षा बहाल करने और अराजकता रोकने के लिए “शांतिपूर्ण और व्यवस्थित” तरीके से उठाया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल व्यवस्था बहाल करना है, न कि हालात को और भड़काना. इस बीच, बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने सभी पक्षों से एक मंच पर आने की अपील की, ताकि “दक्षिणी मुद्दे के लिए न्यायसंगत समाधान की एक व्यापक रूपरेखा” तैयार की जा सके. यह लड़ाई उस फैसले के बाद शुरू हुई, जिसमें सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने सालेम अल-खानबाशी को हदरमौत में नेशनल शील्ड बलों का समग्र कमांडर नियुक्त किया. इस नियुक्ति के साथ उन्हें पूर्ण सैन्य, सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकार दिए गए. सरकार ने इसे पूर्वी प्रांत में स्थिरता बहाल करने की कोशिश बताया.

दो साल की संक्रमणकालीन अवधि की शुरुआत

झड़पें शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद STC ने एक स्वतंत्र दक्षिणी राज्य की घोषणा की दिशा में दो साल के संक्रमणकाल की शुरुआत का ऐलान कर दिया. STC प्रमुख ऐदारूस अल-जुबैदी ने एक टेलीविजन संबोधन में कहा, “हम दो साल की संक्रमणकालीन अवधि की शुरुआत की घोषणा करते हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हैं कि वह दक्षिण और उत्तर के संबंधित पक्षों के बीच संवाद को प्रायोजित करे.” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बातचीत विफल रहती है या दक्षिण यमन पर दोबारा हमला होता है, तो समूह “तुरंत” स्वतंत्रता की घोषणा कर देगा.

STC का कदम देश की एकता के लिए ‘रेड लाइन’

अल-जुबैदी ने कहा, “यदि इस अपील पर ध्यान नहीं दिया गया या दक्षिण के लोगों, उनकी भूमि या उनकी सेनाओं पर कोई सैन्य हमला हुआ, तो यह संवैधानिक घोषणा उसी समय से तुरंत और सीधे प्रभावी मानी जाएगी.” यह घोषणा यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार या हूती आंदोलन को स्वीकार्य होने की संभावना नहीं है. हूती आंदोलन उत्तरी यमन के बड़े हिस्से और राजधानी सना पर नियंत्रण रखता है. इस कदम को देश की एकता के लिए ‘रेड लाइन’ माना जा रहा है, क्योंकि STC का यह कदम यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती आंदोलन को स्वीकार्य होने की संभावना नहीं है. हूती उत्तरी यमन के बड़े हिस्से और राजधानी सना पर नियंत्रण रखते हैं और इस घोषणा को देश की एकता के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है.

UAE ने जाते-जाते कर दिया खेल

इस पूरे विवाद में सऊदी अरब और यमनी सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात पर STC को समर्थन और हथियार देने के आरोप लगाए हैं. वहीं UAE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है और यमन में अपने सभी सैनिकों की वापसी पूरी कर चुका है. बढ़ते अलगाववादी कदमों और आपसी आरोपों के कारण सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर भी तनाव साफ दिखाई दे रहा है.

पीटीआई भाषा के इनुपट के साथ.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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