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Home World ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, बोले- ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, समझौते के बाद बदले सुर

ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, बोले- ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, समझौते के बाद बदले सुर

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ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, बोले- ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, समझौते के बाद बदले सुर
डोनाल्ड ट्रंप.

Trump Iran Ballistic Missiles: अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (एमओयू) को लेकर नई बहस छिड़ गई है. समझौते के प्रभावी होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के पास सीमित संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें रहने पर उन्हें आपत्ति नहीं है. इतना ही नहीं उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर हथियारों पर भी बड़ा नरम बयान दिया. ट्रंप ने ईरान की संपत्तियों को भी मुक्त करने की बात स्वीकार की. यह बयान इसलिए अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि युद्ध शुरू होने के समय अमेरिका और इजरायल दोनों ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने की बात कर रहे थे.

ट्रंप बोले- दूसरे देशों के पास हैं तो ईरान के पास भी कुछ हो सकती हैं

फ्रांस में जी-7 समिट के इतर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ‘अगर दूसरे देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं तो ईरान के पास कुछ मिसाइलें होने से उन्हें पूरी तरह रोकना थोड़ा अनुचित होगा.’ उन्होंने सऊदी अरब और कतर का उदाहरण देते हुए कहा, ‘अगर उनके पास ऐसी मिसाइलें हैं तो अनुपातिक रूप से ईरान के पास भी कुछ होना ठीक है.’

ट्रंप ने यह भी कहा कि मिसाइलें उतनी बड़ी समस्या नहीं हैं जितनी परमाणु हथियार. उनके शब्दों में, ‘मिसाइलें किसी छोटे इलाके को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन वे दुनिया को तबाह नहीं करतीं, जैसा कि परमाणु हथियार कर सकते हैं.’

युद्ध के दौरान था मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने का लक्ष्य

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब ट्रंप प्रशासन का दावा था कि ईरान की मिसाइल क्षमता और परमाणु कार्यक्रम दोनों को कमजोर करना जरूरी है. ट्रंप ने उस समय कहा था कि ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा.

हालांकि, अब उनका ताजा बयान संकेत देता है कि वॉशिंगटन इस मुद्दे पर पहले जैसी सख्त स्थिति में नहीं है. फिर भी ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अगले 60 दिनों तक चलने वाली वार्ताओं में मिसाइल कार्यक्रम पर चर्चा जारी रहेगी.

यूरेनियम भंडार सौंपने की शर्त भी नहीं

समझौते के सामने आए विवरणों के अनुसार ईरान को अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम भंडार को तुरंत सौंपने की बाध्यता नहीं दी गई है. एमओयू में कहा गया है कि इस मुद्दे का समाधान अगले 60 दिनों में तैयार होने वाले एक अलग तंत्र के तहत किया जाएगा. इसमें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में संवर्धित यूरेनियम को कम स्तर पर लाने की प्रक्रिया पर चर्चा होगी.

ट्रंप ने इस मुद्दे को भी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं बताया. उन्होंने दावा किया कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर पहले हुए हमलों के बाद संवर्धित सामग्री मलबे के नीचे दब चुकी है. उन्होंने कहा, ‘यह सामग्री अब उतनी मूल्यवान नहीं है, लेकिन मनोवैज्ञानिक तौर पर हम उसे हासिल करना चाहेंगे. कोई उसे छू भी नहीं सकता.’

प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए फंड पर भी बयान

ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका को ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियां वापस करनी पड़ सकती हैं. उन्होंने कहा, ‘हमने उनका काफी पैसा रोका हुआ है. वह उनका अपना पैसा है. मुझे लगता है कि हमें उसे वापस करना होगा.’ ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ऐसा नहीं करता तो वैश्विक निवेशकों का डॉलर पर भरोसा प्रभावित हो सकता है. इतना ही नहीं अमेरिका ने ईरान के 300 बिलियन डॉलर रिकंस्ट्रक्शन फंड को भी मान्यता दे दी है. इसका पैसा कहां से आएगा, इस पर अभी खुलकर बात नहीं हुई है. 

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राष्ट्रपतियों द्वारा समझौते पर हुए हस्ताक्षर

ट्रंप के फ्रांस के वर्साय पैलेस में डील पर साइन करने के कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि एमओयू के अंतिम मसौदे पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने आधिकारिक हस्ताक्षर कर दिए हैं. ईरानी मीडिया मसूद पेजेश्कियान की फोटोज शेयर कीं.

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी इरना के हवाले से कहा, ‘इस्लामाबाद एमओयू का पाठ राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप ले चुका है. अब समझौते के क्रियान्वयन की परीक्षा शुरू होगी.’ न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इससे पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने डिजिटल रूप से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी निगरानी ट्रंप ने की थी.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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