[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home World पाकिस्तान के लिए भयानक रहा 2025, पिछले 10+ सालों हुए सबसे ज्यादा अटैक, 74% की हुई बढ़ोतरी, मारे गए इतने लोग

पाकिस्तान के लिए भयानक रहा 2025, पिछले 10+ सालों हुए सबसे ज्यादा अटैक, 74% की हुई बढ़ोतरी, मारे गए इतने लोग

0
पाकिस्तान के लिए भयानक रहा 2025, पिछले 10+ सालों हुए सबसे ज्यादा अटैक, 74% की हुई बढ़ोतरी, मारे गए इतने लोग
पाकिस्तान में 2025 में लड़ाई में होने वाली मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई.

Pakistan Violence deaths in 2025: पाकिस्तान में सुरक्षा हालात वर्ष 2025 में गंभीर मोड़ पर पहुंच गए. उग्रवाद, सीमा पार तनाव और आतंकवाद-रोधी अभियानों की तेजी ने देश को पिछले 10 सालों में से भी अधिक समय का सबसे हिंसक साल झेलने पर मजबूर कर दिया. एक स्वतंत्र शोध संस्था की ताजा रिपोर्ट ने इस बढ़ती हिंसा की भयावह तस्वीर सामने रखी है. पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 पाकिस्तान के लिए पिछले दस वर्षों से भी अधिक समय में सबसे घातक साबित हुआ. इस दौरान संघर्ष से जुड़ी मौतों में 74 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिपोर्ट बताती है कि बीते साल कुल 3,413 लोगों की जान गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1,950 था. इनमें से आधे से अधिक मौतों के लिए उग्रवादी घटनाएं जिम्मेदार रहीं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि उग्रवादियों की मौतों में 124 प्रतिशत की तेज़ वृद्धि दर्ज हुई, जिसकी मुख्य वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ तेज किए गए आतंकवाद-रोधी अभियान रहे. टीटीपी अफगान तालिबान से अलग संगठन है, लेकिन हाल के वर्षों में उसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले तेज कर दिए हैं. अक्टूबर के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में भी तनाव बढ़ा है, जब सीमा पर झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए. इस्लामाबाद का आरोप है कि काबुल पाकिस्तानी उग्रवादियों की सीमा-पार गतिविधियों को अनदेखा कर रहा है, जबकि अफगान तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है.

सुरक्षाकर्मियों की मौत में भी हुई बढ़ोतरी

PICSS के प्रबंध निदेशक अब्दुल्ला खान के मुताबिक, मौतों की बढ़ती संख्या के पीछे आत्मघाती हमलों में इजाफा और 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद छोड़े गए सैन्य उपकरणों का उग्रवादी संगठनों के हाथ लगना भी एक बड़ा कारण है. इन हथियारों से टीटीपी और अन्य समूहों की कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ी. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में मारे गए लोगों में 667 सुरक्षा कर्मी शामिल थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है. इसे 2011 के बाद का सबसे ऊंचा वार्षिक आंकड़ा बताया गया. वहीं, 580 नागरिकों की मौत दर्ज की गई, जो 2015 के बाद सबसे अधिक है. इसके अलावा, सरकार समर्थक शांति समितियों के 28 सदस्यों की जान भी गई.

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक ने 2025 में कम से कम 1,066 उग्रवादी हमलों का दस्तावेजीकरण किया. इनमें आत्मघाती हमलों की संख्या 53 प्रतिशत बढ़कर 26 तक पहुंच गई. अधिकांश हमलों की जिम्मेदारी टीटीपी समेत अन्य उग्रवादी संगठनों ने ली. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सुरक्षा बलों ने वर्ष 2025 में लगभग 500 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया, जबकि 2024 में यह संख्या 272 थी.

अफगानों के खिलाफ ऐक्शन के बाद बढ़े हमले

यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ सप्ताह पहले पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया था कि सुरक्षा बलों ने 2025 में 67,023 खुफिया-आधारित अभियान चलाए, जिनमें 1,873 उग्रवादी मारे गए. इनमें 136 अफगान नागरिक भी शामिल थे.

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हिंसा में यह बढ़ोतरी 9 अक्टूबर को काबुल में हुए विस्फोटों के बाद और तेज़ हो गई, जिनके लिए अफगान तालिबान ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था. इसी बीच, गुरुवार को बलूचिस्तान के सिबी जिले में सड़क किनारे लगाए गए बम विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए. किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन अधिकारियों को संदेह है कि इसके पीछे अलगाववादी उग्रवादी हो सकते हैं.

बॉर्डर हमले के बाद रुका व्यापार

कतर की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम अब तक काफी हद तक कायम है, लेकिन नवंबर में इस्तांबुल में हुई तीन दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सके. अक्टूबर से सभी सीमा चौकियां बंद हैं, जिससे व्यापार और आम लोगों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि सीमा चौकियों को दोबारा खोलना इस बात पर निर्भर करेगा कि काबुल लिखित आश्वासन दे कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमलों के लिए नहीं होगा. उन्होंने यह भी बताया कि अफगानिस्तान के लिए मानवीय सहायता लेकर जा रहे संयुक्त राष्ट्र के ट्रक सीमा पर फंसे हुए हैं.

मुनीर ने दी धमकी तो मौलाना ने दी थपकी

दिसंबर में पाकिस्तान के नव नियुक्त सशस्त्र बल प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अफगान तालिबान सरकार से साफ कहा था कि उसे इस्लामाबाद के साथ संबंध बनाए रखने और पाकिस्तानी तालिबान का समर्थन करने के बीच किसी एक का चयन करना होगा. हालांकि इसके बाद दोनों देशों के प्रभावशाली उलेमाओं (पाकिस्तान से मौलान फजलुर रहमान और अफगानिस्तान से सिराजुद्दीन हक्कानी) के बीच नरमी भरे बयान सामने आए, जिससे हालात कुछ शांत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में तनाव की चिंगारी अब भी बनी हुई है.

ये भी पढ़ें:-

पाकिस्तानी पुरातत्वविदों ने तक्षशिला में की खुदाई, असल भारत से हुआ रूबरू, मिले दुर्लभ सिक्के, पत्थर और इतिहास

हाथ मलता रह गया यूरोप का एयरबस, बांग्लादेश ने अमेरिका के बोइंग के साथ कर ली डील, खरीदेगा इतने हवाई जहाज

सऊदी अरब और अमेरिका ने 2025 में दी रिकॉर्ड फांसी, किंगडम में तो विदेशी बने सबसे बड़े शिकार, कारण क्या?

Previous article कार के धक्के से बाइक सवार तीन लोग जख्मी, दो रेफर
Next article बिना हेलमेट वालों के लिए स्लोगन ले चौक पर पुलिस हुए खड़ा
Avatar Of Anant Narayan Shukla
अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel