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Home World 1 महीने में UAE को इतना कर्ज चुकाएगा पाकिस्तान, एक झटके में खत्म होगा 18% विदेशी मुद्रा भंडार

1 महीने में UAE को इतना कर्ज चुकाएगा पाकिस्तान, एक झटके में खत्म होगा 18% विदेशी मुद्रा भंडार

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1 महीने में UAE को इतना कर्ज चुकाएगा पाकिस्तान, एक झटके में खत्म होगा 18% विदेशी मुद्रा भंडार
यूएई ने पाकिस्तान को आखिरी एक महीने दिए.

Pakistan to Pay UAE Loan: कर्जों पर चल रहे पाकिस्तान को अब इसे चुकाने का समय आ गया है. पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने इस महीने के भीतर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा लिए गए पूरे कर्ज को चुकाने का फैसला किया है. लेकिन इस कर्ज को चुकाने में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार से 18 प्रतिशत रकम बाहर हो जाएगी. वह इस रकम को वापस करने में अपनी राष्ट्रीय गरिमा का हवाला दे रहा है. 

पाकिस्तान इस महीने के अंत से पहले यूएई को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाएगा. इसमें कई बार ली गई रकम शामिल है, एक कर्ज तो उसने तीस साल पहले लिया था. डॉन अखबार ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि यह रकम जल्द से जल्द लौटा दी जाएगी. अधिकारी ने कहा कि यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार को काफी कम कर देगा, लेकिन वित्तीय कारणों के लिए राष्ट्रीय गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, पाकिस्तान यह कीमत चुकाने को तैयार है.

पाकिस्तान ने कब लिया कर्ज और कैसे चुकाएगा?

पाकिस्तान ने 1996-97 में सिर्फ एक साल के लिए 450 मिलियन डॉलर का कर्ज लिया. इसके बाद यूएई ने 2019 में पाकिस्तान को उसके भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) को स्थिर करने के लिए वित्तीय सहायता दी थी. इसे 2019 से कई बार बढ़ाया (रोलओवर) गया था. 

हाल के महीनों में इन विस्तारों की अवधि घटकर केवल एक महीने तक रह गई थी. ताजा फैसले के बाद अब अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट के जरिए जमा की गई रकम को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है.

पाकिस्तान 3.5 अरब डॉलर की इस पूरी राशि को इसी महीने में तीन किश्तों में लौटाएगा. अप्रैल की 11 , 17 और 23 तारीख को पाकिस्तान क्रमशः 450 मिलियन डॉलर, 2 अरब डॉलर और 1 अरब डॉलर वापस करेगा. 

विदेशी मुद्रा भंडार को भारी नुकसान होगा

वर्तमान में पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 16.3 अरब डॉलर हैं.  अप्रैल में ही 3 अरब डॉलर की रकम इससे बाहर होती है, तो इसमें 18 प्रतिशत की कमी आएगी. इस राशि की वापसी से पाकिस्तानी रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और यदि नई फंडिंग नहीं मिली तो आईएमएफ कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान की स्थिति जटिल हो सकती है. क्योंकि इससे बाहरी सुरक्षा कवच (एक्सटर्नल बफर) कमजोर होगा और आयात कवर भी घटेगा. 

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ चल रहे कार्यक्रम के तहत, पाकिस्तान को अपने विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखने और बाहरी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे तीन प्रमुख साझेदारों से लगभग 12.5 अरब डॉलर के रोलओवर की आवश्यकता है. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के डिपॉजिट भी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा थे.

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वह विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के बाहरी प्रवाह की लगातार निगरानी और प्रबंधन कर रहा है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान सरकार अपने सभी बाहरी दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध (कमिटेड) है. हालांकि, उन्होंने किसी भी योजना का खुलासा नहीं किया है.

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यूएई क्यों मांग रहा अपना पैसा?

ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात पर सुरक्षा का दबाव काफी बढ़ गया है. बीते एक महीने में सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने के बावजूद उसे आर्थिक और रणनीतिक नुकसान झेलना पड़ा है. ऐसे हालात में अबू धाबी अपनी प्राथमिकताओं को फिर से तय कर रहा है. खासतौर पर घरेलू सुरक्षा बजट को मजबूत करना और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे (जैसे सऊदी नेतृत्व वाले मुस्लिम नाटो) में अपनी भूमिका को टिकाऊ बनाना. संभवतः इसी रणनीतिक सोच के तहत उसने पाकिस्तान से अपने दिए गए कर्ज की वापसी की मांग तेज कर दी है, ताकि बाहरी जोखिमों के बीच अपनी वित्तीय स्थिति को संतुलित रखा जा सके.

दूसरी ओर, इस फैसले के पीछे कूटनीतिक असंतोष भी एक बड़ा कारण बनकर उभरा है. क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान ईरान के प्रति पाकिस्तान के अपेक्षाकृत नरम रुख ने अबू धाबी को असहज किया है. रियाद में हुई बैठकों में पाकिस्तान द्वारा ईरान के खिलाफ खुलकर समर्थन न देने और उसके झुकाव के संकेतों ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा की है. इससे आपसी भरोसे में कमी आई और आर्थिक फैसलों पर भी असर पड़ा.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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