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Home World पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बस खाई में गिरी, महिलाओं-बच्चों सहित 40 की मौत

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बस खाई में गिरी, महिलाओं-बच्चों सहित 40 की मौत

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बस खाई में गिरी, महिलाओं-बच्चों सहित 40 की मौत
पाकिस्तान में बस खाई में गिरी, फोटो-सोशल मीडिया एक्स


Pakistan News : पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में शुक्रवार को एक बस के गहरी खाई में गिर जाने से महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई.पीटीआई न्यूज एजेंसी ने वहां के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है.

दुर्गम मोड़ के पास हुई दुर्घटना

यह हादसा उस समय हुआ, जब पेशावर जा रही बस बलूचिस्तान के शेरानी जिले को पार करने के बाद खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान जिले में दाखिल हुई. अधिकारियों ने बताया कि आठ लोगों को बचा लिया गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस बात की आशंका है कि पहाड़ी इलाके में एक दुर्गम मोड़ से गुजरते वक्त बस के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया, जिससे बस फिसलकर सड़क से नीचे खाई में गिर गई.

हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू

बस के खाई में गिरने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. वहां के अधिकारियों ने इस संबंध में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि दुर्गम भूभाग, खराब मौसम और यातायात नियमों के लगातार उल्लंघन जैसे कारणों की वजह से खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी इलाकों में सड़क दुर्घटनाएं बहुत अधिक होती हैं.

राष्ट्रपति जरदारी ने जताया शोक

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस दुर्घटना पर दुख जताया और पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं जताईं हैं. उन्होंने एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा कि इस दुखद घटना के बाद पूरा देश प्रभावित परिवारों के दुख में शामिल है. उन्होंने घायलों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना की और संबंधित डिपार्टमेंट को घायलों को सबसे अच्छी मेडिकल सुविधाएं देने का निर्देश दिया.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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