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Home World सीरिया की जेल से भागे इस्लामिक स्टेट के आतंकी, सरकार बोली 120, कुर्दों ने कहा 1500, US के रहते कब और कैसे हुई यह घटना?

सीरिया की जेल से भागे इस्लामिक स्टेट के आतंकी, सरकार बोली 120, कुर्दों ने कहा 1500, US के रहते कब और कैसे हुई यह घटना?

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सीरिया की जेल से भागे इस्लामिक स्टेट के आतंकी, सरकार बोली 120, कुर्दों ने कहा 1500, US के रहते कब और कैसे हुई यह घटना?
सीरिया में आईएस का खात्मा होने के बाद से अल-शद्दादी जेल में आतंकियों को बंद किया गया था. फोटो- एक्स (@Ahmed_hassan_za).

सीरिया के शद्दादी शहर से एक बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है. कुर्द क्षेत्र की इस जेल से इस्लामिक स्टेट के कई कैदी भाग गए हैं. यह मामला सीरिया के हसाका इलाके की अल-शद्दादी जेल से जुड़ा है. सरकार का कहना है कि करीब 120 कैदी जेल से निकल भागे हैं, जबकि कुछ कुर्द मीडिया रिपोर्टों में यह संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है. कुर्दिश वेबसाइट रुडॉ के मुताबिक, कुर्द बलों के एक स्पोक्सपर्सन ने दावा किया कि लगभग 1,500 इस्लामिक स्टेट के लोग जेल से फरार हो गए. हालांकि सरकार ने इस आंकड़े को सही नहीं माना है.

कैदियों के भागने की खबर मिलते ही सीरियाई सेना और खास सुरक्षा दल शद्दादी पहुंच गए. पूरे शहर और आसपास के इलाकों में तलाशी शुरू कर दी गई. अब तक 81 लोगों को दोबारा पकड़ लिया गया है. बाकी की तलाश अब भी जारी है. इससे पहले सीरियाई सेना ने कहा था कि यह जेल कुर्द बलों के कब्जे में थी और वहीं से कुछ इस्लामिक स्टेट के लड़ाके भागे. सेना ने आरोप लगाया कि कुर्द बलों की लापरवाही या जानबूझकर किए गए कदम की वजह से यह घटना हुई.

कैसे हुई यह घटना?

अमेरिका की फॉक्स न्यूज के अनुसार, जेल से आतंकियों के भागने की घटना उस समय हुई जब कुर्द बलों और सीरियाई सरकार के बीच जेल और सुरक्षा की जिम्मेदारी बदली जा रही थी. यह काम ठीक से और समय पर नहीं हो पाया. कहा जा रहा है कि उस वक्त लड़ाई रोकने का समझौता हो चुका था, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी उलझे हुए थे. सीरियाई सरकार का आरोप है कि कुर्द बल जेल और सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपने में देर कर रहे थे, जिससे हालात बिगड़ गए.

टेरर अफेक्टेड एरियाज को काबू में करने की कोशिश कर रहा सीरिया

इस घटना से पहले भी हालात तनाव भरे थे. कई दिनों तक सरकारी सेना और कुर्द बलों के बीच झड़पें चलती रहीं. आखिरकार रविवार को कुर्द बलों ने रक्का और दैर-अल-जोर जैसे बड़े इलाकों से पीछे हटने का फैसला किया. ये दोनों इलाके ऐसे थे जहां कुर्द बल लंबे समय से काबिज थे और यहीं देश के बड़े तेल क्षेत्र भी मौजूद हैं. अब इन इलाकों में हालात को काबू में लाने की कोशिश की जा रही है.

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समझौते में एरिया की अदला-बदली थी शामिल

सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा पहले ही कुर्द इलाकों को लेकर नाराजगी जता चुके थे. उन्होंने साफ संकेत दिए थे कि अब कुर्द बलों का अलग नियंत्रण खत्म होना चाहिए. रविवार को हुए समझौते के तहत कुर्द बलों ने उन दो इलाकों से भी हटने पर हामी भर दी, जिन पर वे सालों से काबिज थे. कई दिनों तक चली झड़पों के बाद यह समझौता हुआ था. इसी समझौते में यह भी तय हुआ था कि इस्लामिक स्टेट के कैदियों वाली जेलों की जिम्मेदारी अब कुर्द बलों से हटकर सीरियाई सरकार के पास जाएगी.

अमेरिका ने अपना काम पूरा किया, लेकिन सीरियाई आर्मी ने गड़बड़ाया मामला

इससे पहले अमेरिका ने कुर्द बलों के साथ मिलकर सबसे खतरनाक विदेशी इस्लामिक स्टेट लड़ाकों को दूसरी, ज्यादा सुरक्षित जेलों में भेज दिया था. लेकिन जब अल-शद्दादी जेल की जिम्मेदारी बदली जा रही थी, उसी दौरान जेल खाली पड़ गई. कुर्द सुरक्षाकर्मी वहां से हट गए और सीरियाई सैनिक अभी पूरी तरह पहुंचे भी नहीं थे. इसी मौके का फायदा उठाकर स्थानीय लोगों ने करीब 200 कैदियों को जेल से बाहर निकाल दिया.

इलाके में कर्फ्यू; ज्यादातर कैदी पकड़े गए

फॉक्स न्यूज के मुताकि, पहले इस जेल में करीब 1,000 कैदी थे, लेकिन उस दिन वहां सिर्फ लगभग 200 ही बचे थे. इनमें ज्यादातर स्थानीय और छोटे स्तर के लड़ाके थे, बड़े विदेशी लड़ाके नहीं. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही थी. बाद में ज्यादातर भागे हुए कैदियों को फिर से पकड़ लिया गया और उन्हें उसी जेल में वापस भेज दिया गया, जो अब सीरियाई सरकार के कब्जे में है.

घटना के बाद सीरियाई सेना ने शद्दादी शहर में कर्फ्यू लगा दिया. पूरे इलाके में तलाशी शुरू कर दी गई ताकि अगर कोई कैदी बचा हो, तो उसे भी पकड़ लिया जाए. अमेरिका ने भी अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है. हवा, जमीन और समुद्र तीनों तरफ से निगरानी तेज कर दी गई है. लड़ाकू विमान दूसरी जगह भेजे गए हैं और भारी सामान लेकर सैन्य विमान इलाके में पहुंचे हैं. एक अमेरिकी युद्धपोत भी जल्द वहां पहुंचने वाला है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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