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Home World वियतनाम जैसी होगी अमेरिका की हालत? क्या है ‘फाइव ओ ‘क्लॉक फॉलीज’, जिसका जिक्र कर ईरान ने घेरा

वियतनाम जैसी होगी अमेरिका की हालत? क्या है ‘फाइव ओ ‘क्लॉक फॉलीज’, जिसका जिक्र कर ईरान ने घेरा

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वियतनाम जैसी होगी अमेरिका की हालत? क्या है ‘फाइव ओ ‘क्लॉक फॉलीज’, जिसका जिक्र कर ईरान ने घेरा
बाएं से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची

Iran US War: अराघची के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सेना दावा कर रही है कि वे जीत रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. उन्होंने इसे अमेरिका की ‘फाइव ओ क्लॉक फॉलीज’ (Five O’Clock Follies) का दूसरा वर्जन बताया है, जो वियतनाम युद्ध के दौरान झूठी जीत की कहानियों के लिए बदनाम था.

क्या है ‘फाइव ओ क्लॉक फॉलीज’?

अराघची ने ‘फाइव ओ क्लॉक फॉलीज’ का जिक्र करके अमेरिका को आईना दिखाया है. 1960 के दशक में वियतनाम की राजधानी साइगॉन में हर शाम 5 बजे अमेरिकी सेना की प्रेस ब्रीफिंग होती थी. इसमें बड़े-बड़े अफसर झूठी कहानियां सुनाते थे कि वे जंग जीत रहे हैं. 1967 में जनरल विलियम वेस्टमोरलैंड ने तो यहां तक कह दिया था कि सुरंग के अंत में रोशनी दिख रही है और दुश्मन कमजोर हो रहा है. लेकिन असल में अमेरिकी सैनिक हर दिन मर रहे थे. आज भी ईरान के विदेश मंत्री का मानना है कि जो बाइडेन के बाद आए ट्रंप प्रशासन के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ वैसी ही “काल्पनिक बातें” कर रहे हैं जो हकीकत से कोसों दूर हैं.

वियतनाम युद्ध का वो काला इतिहास

करीब 60 साल पहले अमेरिका ने वियतनाम की जंग में कदम रखा था. उस वक्त भी रिपब्लिकन राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर ने इसकी शुरुआत की थी और बाद में डेमोक्रेट लिंडन जॉनसन ने इसे बढ़ा दिया. अमेरिका ने वियतनाम पर इतने बम गिराए थे जितने पूरे दूसरे विश्व युद्ध में भी नहीं गिरे थे. उत्तर वियतनाम की सेना और उनके साथ देने वाले ‘वियतकांग’ के गोरिल्ला लड़ाकों ने अमेरिकी सेना की नाक में दम कर दिया था.

1968 के ‘टेट ऑफेंसिव’ हमले ने दिखा दिया था कि अमेरिकी सरकार जो दावे कर रही थी, वे सब झूठे थे. अंत में 1973 में निक्सन के समय अमेरिका को पीछे हटना पड़ा और 1975 में साइगॉन पर वियतनाम का कब्जा हो गया. इस पूरी जंग में 58,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए और करीब 20 से 30 लाख वियतनामी लोग खत्म हो गए. 

F-35 और युद्धपोतों पर ईरान का बड़ा दावा

ईरानी विदेश मंत्री ने सबूतों के साथ अमेरिका को घेरा है. उन्होंने बताया कि जहां अमेरिका दावा कर रहा है कि ईरान का एयर डिफेंस खत्म हो गया है, वहीं एक हाई-टेक F-35 फाइटर जेट को ईरानी हमले के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. इसके अलावा, अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान की नेवी खत्म हो चुकी है, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिकी युद्धपोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन ईरानी तट से दूर हट गए हैं.

अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी के दावे पर सवाल

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा था कि अमेरिका ‘निर्णायक रूप से जीत’ रहा है और ईरान के एयर डिफेंस को ‘सपाट’ (Flattened) कर दिया गया है. लेकिन अराघची ने इसे ‘हकीकत से दूर’ बताया. US सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कन्फर्म किया है कि एक F-35 जेट को ईरान के ऊपर कॉम्बैट मिशन के दौरान इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी, जिसकी जांच जारी है. वहीं, रिपोर्ट के अनुसार, 12 मार्च को USS जेराल्ड आर. फोर्ड के लांड्री रूम में आग लगने के बाद उसे मरम्मत के लिए ग्रीस के सूडा बे भेजा गया है. 

कितना हुआ है अब तक नुकसान?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका के 12 MQ-9 रीपर ड्रोन और 4 फाइटर जेट तबाह हो चुके हैं.

  • अमेरिका: कम से कम 13 सैनिकों की मौत और करीब 200 घायल. 
  • ईरान: स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत और 18,000 लोग घायल हुए हैं.

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ट्रंप प्रशासन में आपसी कलह

इस युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही प्रशासन के अंदर विरोध का सामना करना पड़ रहा है. उनके काउंटर-टेरर चीफ जो केंट ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि इजराइल ने अमेरिका को इस युद्ध में धकेला है. दूसरी तरफ, ट्रंप ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि वे फिलहाल तेहरान के साथ किसी भी सीजफायर के लिए तैयार नहीं हैं और अमेरिका का सैन्य ऑपरेशन जारी रहेगा. अराघची ने तंज कसते हुए कहा कि दशक बदल गया है, लेकिन अमेरिका का “हम जीत रहे हैं” वाला झूठ आज भी वैसा ही है.

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