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Home World IRGC का ऐलान: होर्मुज के अपने एरिया में लागू करेंगे नए नियम, ईरान में आएगी सुरक्षा और समृद्धि

IRGC का ऐलान: होर्मुज के अपने एरिया में लागू करेंगे नए नियम, ईरान में आएगी सुरक्षा और समृद्धि

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IRGC का ऐलान: होर्मुज के अपने एरिया में लागू करेंगे नए नियम, ईरान में आएगी सुरक्षा और समृद्धि
होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने ईरान को अमेरिका के साथ संघर्ष में अपर हैंड दिया.

Iran Hormuz Strait: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपनी दक्षिणी तटरेखा से सटे समुद्री क्षेत्रों के लिए नए नियम लागू करने का निर्णय लिया है. ईरानी सरकारी मीडिया, प्रेस टीवी के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य अरब खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर अपना नियंत्रण और अधिक मजबूत करना है. IRGC की नौसेना कमान द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि ईरानी बल देश की लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर पूरी तरह से नियंत्रण स्थापित करेंगे. 

1,243 मील लंबा यह क्षेत्र अरब खाड़ी से लेकर रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट तक फैला हुआ है. बयान के अनुसार, इन नए कदमों का लक्ष्य इन जल क्षेत्रों को ईरानी जनता के लिए गर्व और शक्ति का स्रोत बनाना है. यह पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि का माध्यम बनेगा. 

विदेशी शक्तियों को कड़ी चेतावनी

यह घोषणा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई के उस निर्देश के तुरंत बाद आई है, जिसमें उन्होंने बाहरी हस्तक्षेप के प्रति सख्त रुख अपनाया था. उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी के खिलाफ साजिश रचने वाले विदेशियों के लिए इस क्षेत्र में कोई जगह नहीं है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा था कि यदि विदेशी ताकतें यहाँ रुकने की कोशिश करती हैं, तो वे केवल समुद्र की गहराइयों में ही मिलेंगी. 13 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई बातचीत के विफल होने के बाद, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू की है, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हुई.

अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तीखा प्रहार

सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया पर पश्चिमी एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की क्षमता पर सवाल उठाए. उन्होंने अमेरिका और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में इन ठिकानों को कागजी शेर की संज्ञा दी. सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में खामेनेई ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि जो अमेरिकी ठिकाने खुद की रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं, वे इस क्षेत्र के उन देशों की रक्षा क्या करेंगे जो अमेरिका पर भरोसा करते हैं. उनका इशारा स्पष्ट रूप से इजरायल और उन अरब देशों की ओर था जो अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं.

खामेनेई ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में फारस की खाड़ी को केवल एक जल क्षेत्र मानने से इनकार करते हुए इसे ईरान की सभ्यता और पहचान का अभिन्न अंग बताया. उन्होंने कहा, फारस की खाड़ी केवल नीले पानी का एक विस्तार नहीं है; यह हमारी पहचान और सभ्यता का हिस्सा है, राष्ट्रों को जोड़ने वाला एक माध्यम है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है.

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क्षेत्र में नई व्यवस्था की शुरुआत

खामेनेई ने भविष्यवाणी की है कि भविष्य में फारस की खाड़ी पूरी तरह से अमेरिकी प्रभाव से मुक्त हो जाएगी. ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने ‘पर्शियन गल्फ डे’ के अवसर पर कहा कि इस क्षेत्र का भाग्य इस क्षेत्र के देशों के हाथों में है और दूर बैठी शक्तियों को इसमें दखल नहीं देना चाहिए. उन्होंने मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय बदलावों को एक नई व्यवस्था की शुरुआत करार दिया. उनके अनुसार, यह नई व्यवस्था ईरान की प्रतिरोध की नीतियों और क्षेत्रीय देशों के आपसी सहयोग से तैयार हो रही है, जिसमें बाहरी दखलंदाजी के लिए कोई स्थान नहीं होगा.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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