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Home World 30 साल तक जापान में किया काम, अब मिला देश छोड़ने का आदेश, दास्तान सुनाते रो पड़े भारत के मनीष कुमार

30 साल तक जापान में किया काम, अब मिला देश छोड़ने का आदेश, दास्तान सुनाते रो पड़े भारत के मनीष कुमार

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30 साल तक जापान में किया काम, अब मिला देश छोड़ने का आदेश, दास्तान सुनाते रो पड़े भारत के मनीष कुमार
भारतवंशी मनीष कुमार. फोटो- स्क्रीनशॉट.

Indian Restaurateur Japan Visa Crisis: करीब 30 साल से जापान में रह रहे भारतीय मूल के रेस्टोरेंट कारोबारी मनीष कुमार का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह जापान सरकार की सख्त हुई इमिग्रेशन नीतियों का जिक्र करते हुए मंच पर रो पड़ते हैं. मनीष कुमार का कहना है कि उनका बिजनेस मैनेजर वीजा रिन्यू नहीं किया गया, जिसके कारण अब उन्हें अपना रेस्टोरेंट बंद कर भारत लौटने के लिए कहा जा रहा है.

मनीष कुमार जापान के साईतामा परफेक्चर में भारतीय रेस्टोरेंट संचालित करते हैं. बताया जा रहा है कि वह पिछले 18 वर्षों से वहां कारोबार चला रहे थे. उन्होंने 13 मई को आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी स्थिति साझा की. इसी दौरान दिया गया उनका भाषण इंटरनेट पर वायरल हो गया. मनीष ने भावुक होते हुए कहा कि उनके बच्चे जापान में पैदा हुए, वहीं पले-बढ़े और अब हाई स्कूल में पढ़ रहे हैं. उनके मुताबिक, बच्चे केवल जापानी भाषा जानते हैं और उनके सभी दोस्त भी जापानी हैं.

‘अचानक कह दिया भारत लौट जाओ’

अपनी बातों में मनीष कुमार ने जिक्र किया कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से जापान में घर और कारोबार खड़ा किया. स्थानीय लोगों, ग्राहकों और प्रशासन के सहयोग से उन्होंने वहां अपनी जिंदगी बनाई. उन्होंने सवाल उठाया कि नियम बदल जाने के बाद अचानक किसी परिवार से देश छोड़ने को कहना कितना मानवीय है. भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया, फिर भी अब उन्हें और उनके परिवार को अनिश्चित भविष्य का सामना करना पड़ रहा है.

नए वीजा नियमों में फंस गया मामला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनीष कुमार लगातार अपने बिजनेस मैनेजर वीजा का नवीनीकरण कराते रहे, लेकिन उन्होंने स्थायी निवास या जापानी नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया. इसी बीच जापान सरकार ने पिछले साल बिजनेस मैनेजर वीजा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया. नए नियमों के तहत न्यूनतम पूंजी निवेश की सीमा 50 लाख येन से बढ़ाकर 3 करोड़ येन कर दी गई. यह राशि भारतीय मुद्रा में लगभग 1.9 लाख डॉलर के बराबर बताई जा रही है.

जापानी भाषा योग्यता भी बनी चुनौती

नई व्यवस्था के तहत अब आवेदकों या उनके कर्मचारियों को जापानी भाषा दक्षता भी साबित करनी होगी. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए JLPT N2 स्तर तक की भाषा क्षमता जरूरी मानी जा रही है. जापान सरकार का कहना है कि कुछ लोग बिजनेस वीजा का इस्तेमाल केवल माइग्रेशन के उद्देश्य से कर रहे थे. जांच में कथित तौर पर कई शेल कंपनियों का मामला सामने आने के बाद नियम सख्त किए गए.

वीजा आवेदन में भारी गिरावट

नियमों में बदलाव के बाद जापान में बिजनेस मैनेजर वीजा के आवेदन तेजी से घटे हैं. जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए प्रावधान लागू होने के बाद इस श्रेणी में करीब 96 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है.जापानी सांसद किमी ओनोडा ने हाल ही में कहा कि नए नियमों से उन आशंकाओं को काफी हद तक दूर किया गया है, जिनमें बिजनेस वीजा के दुरुपयोग की बात कही जा रही थी.

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हालांकि मनीष कुमार का मामला सामने आने के बाद जापान की इमिग्रेशन नीतियों को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई है. कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि दशकों से जापान में रह रहे विदेशी नागरिकों के लिए अचानक नियम बदलना कितनी बड़ी मानवीय और सामाजिक चुनौती बन सकता है.इस मामले को लेकर एक ऑनलाइन याचिका भी शुरू की गई है. Change.org पर शुरू हुई इस याचिका पर करीब 60 हजार हस्ताक्षर जुटाए गए हैं, जिसे जापान की इमिग्रेशन सर्विस एजेंसी को सौंपा गया है.

लंबी समय से रह रहे विदेशियों की बढ़ी चिंता

इस मामले ने उन हजारों विदेशी कारोबारियों और परिवारों की चिंता भी बढ़ा दी है, जो वर्षों से जापान में रह रहे हैं लेकिन अभी तक स्थायी नागरिकता नहीं ले पाए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त इमिग्रेशन नियमों के कारण लंबे समय से बसे विदेशी समुदायों के सामने कानूनी और सामाजिक अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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