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Home World इबोला के बुंडीबुग्यो वेरिएंट से दहला कांगो, 131 पहुंचा मौत का आंकड़ा, 500 से ज्यादा लोग संक्रमित

इबोला के बुंडीबुग्यो वेरिएंट से दहला कांगो, 131 पहुंचा मौत का आंकड़ा, 500 से ज्यादा लोग संक्रमित

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इबोला के बुंडीबुग्यो वेरिएंट से दहला कांगो, 131 पहुंचा मौत का आंकड़ा, 500 से ज्यादा लोग संक्रमित
इबोला के बुंडीबुग्यो वेरिएंट का कहर

Ebola Outbreak: अफ्रीकी देश कांगो में इबोला कहर बरपा रहा है. पूर्वी कांगो में इबोला वायरस के प्रकोप से अब तक कम से कम 131 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 500 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं. कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी. स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर कंबा ने कहा- प्रभावित इलाकों में 513 संदिग्ध मामले सामने आए हैं और 131 लोगों की मौत दर्ज की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि सभी मौतों की जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कितने मामले वास्तव में इबोला संक्रमण से जुड़े हैं.

बुंडीबुग्यो वेरिएंट मचा रहा तबाही

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मौजूदा प्रकोप इबोला वायरस के दुर्लभ बुंडीबुग्यो वेरिएंट के कारण हो रहा है. इस प्रकार के वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या उपचार मौजूद नहीं है, इस कारण इतने बड़े पैमाने पर लोगों की जान जा रही है.

कांगो और युगांडा में इबोला के सबसे ज्यादा मामले

कांगो और यूगांडा में इबोला के 20 से ज्यादा प्रकोप सामने आ चुके हैं, लेकिन बुंडीबुग्यो वायरस की पहचान केवल तीसरी बार हुई है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि बुनिया, गोमा, मोंगबवालु, बुटेम्बो और न्याकुंडे समेत कई इलाकों में संक्रमण के मामलों की पुष्टि हो चुकी है.

WHO ने घोषित किया स्वास्थ्य इमरजेंसी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने रविवार को इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया था. WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने जिनेवा में कहा कि वह महामारी के स्तर और इसके तेजी से फैलने को लेकर बेहद चिंतित हैं.

क्या है इबोला वायरस और क्या हैं इसके लक्षण?

इबोला एक गंभीर और कई मामलों में जानलेवा बीमारी है. यह इबोला वायरस के कारण होती है. यह संक्रमित व्यक्ति या जानवर के खून, शरीर के तरल पदार्थ या ऊतकों के सीधे संपर्क में आने से फैलती है. इबोला के लक्षण अचानक सामने आ सकते हैं. इसकी शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं. बाद में मरीज में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते और गुर्दे और यकृत से जुड़ी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं.

अलर्ट पर भारत में स्वास्थ्य एजेंसियां

अफ्रीकी देशों में इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत की स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं. स्वास्थ्य एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं. भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (National Centre for Disease Control, NCDC) पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहा है. टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने इबोला वायरस रोग पर कहा- घबराने की कोई वजह नहीं है. यह कोविड-19 महामारी जैसा बिलकुल नहीं है. जागरूकता, निगरानी और सर्वेक्षण भी महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि सरकार इबोला वायरल को लेकर गंभीर है.

भारत में फिलहाल कोई मामला नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल भारत में इबोला वायरस संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है. हालांकि, बढ़ती अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और वैश्विक संपर्क के कारण सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी माना जा रहा है. दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर संजय राय ने कहा कि देश के हवाई अड्डों पर जांच व्यवस्था और रोग निगरानी प्रणाली पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी हुई है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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