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Home World ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तारीखें तय, मौत के 4 महीने बाद मशहद में होंगे दफन

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तारीखें तय, मौत के 4 महीने बाद मशहद में होंगे दफन

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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तारीखें तय, मौत के 4 महीने बाद मशहद में होंगे दफन
अली खामेनेई की मौत के बाद प्रदर्शन करते लोग. फोटो- एक्स (ANI).

Ali Khamenei Funeral: ईरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं. ईरानी अधिकारियों ने उनके अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है. सरकारी मीडिया के अनुसार, उनके अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई को राजधानी तेहरान से शुरू होंगे और 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफन के साथ संपन्न होंगे.

ईरान की समाचार एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देने के लिए 4 और 5 जुलाई को तेहरान स्थित इमाम खोमैनी प्रेयर ग्राउंड्स में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसके बाद 6 जुलाई को तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी.

इसके अगले चरण में 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में समारोह आयोजित होंगे. वहीं 9 जुलाई को मशहद में अंतिम कार्यक्रम किए जाएंगे. खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रजा के पवित्र दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.

28 फरवरी के हवाई हमले में हुई थी मौत

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को ईरान पर हुए इजरायली और अमेरिकी हवाई हमलों के पहले ही दिन हो गई थी. उस समय उनकी उम्र 86 वर्ष थी. वे करीब 36 वर्षों तक इस्लामिक गणराज्य ईरान के सर्वोच्च नेता रहे और देश की राजनीतिक तथा धार्मिक व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली चेहरे माने जाते थे. जिस हवाई हमले में उनकी मौत हुई, उसमें तेहरान स्थित उनका केंद्रीय परिसर पूरी तरह तबाह हो गया था.

बेटे मोजतबा खामेनेई ने संभाली कमान

हमले में अली खामेनेई के 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई भी घायल हुए थे. उनकी पत्नी की भी उसी हमले में मौत हो गई थी. बाद में मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया और उन्होंने अपने पिता की जगह संभाली.

अपने लंबे कार्यकाल के दौरान अली खामेनेई ने ईरान को मध्य पूर्व में अमेरिका-विरोधी एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित किया. उन्होंने लेबनान के हिजबुल्लाह जैसे सहयोगी संगठनों के जरिए क्षेत्र में ईरान का प्रभाव बढ़ाया. घरेलू स्तर पर भी उन्होंने सख्त रुख अपनाया और सरकार विरोधी आंदोलनों तथा अशांति की घटनाओं पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखा.

परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से बना रहा टकराव

1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर बने खामेनेई अपने पूरे शासनकाल में अमेरिका के मुखर आलोचक रहे. दूसरी ओर, अमेरिका के कई प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद का समाधान निकालने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई स्थायी सफलता नहीं मिल सकी.

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मुहर्रम में अंतिम संस्कार की योजना टाली

ईरान अपने दिवंगत सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार को पहले मुहर्रम के महीने में करना चाहता था. यह इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है. तीन दिन का यह कार्यक्रम जून में होना था. लेकिन इसे टाल दिया गया.

तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी के मुताबिक, मुहर्रम के शुरुआती दिनों शिया समुदाय के इमाम हुसैन का वार्षिक शोक मनाया जाता है. इसलिए अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को आगे रखा गया. ईरान के अधिकारियों के मुताबिक इस कार्यक्रम में लगभग 1-2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं.

आम तौर पर इस्लामिक कायदे के मुताबिक, किसी की मौत के तुरंत बाद उसे सुपुर्द ए खाक किया जाता है. लेकिन युद्ध या अन्य परिस्थिति की वजह से इसे टाला जा सकता है. हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह का आंतिम संस्कार भी देरी से हुआ था. वहीं अब अली खामेनेई को लगभग 132 दिन बाद उनके गृहनगर मशहद में दफन किया जाएगा. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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