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Home Technology Zoho Arattai ऐप बना WhatsApp किलर, लेकिन क्या आपकी चैट सुरक्षित है?

Zoho Arattai ऐप बना WhatsApp किलर, लेकिन क्या आपकी चैट सुरक्षित है?

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Zoho Arattai ऐप बना WhatsApp किलर, लेकिन क्या आपकी चैट सुरक्षित है?
Zoho Arattai: भारत का WhatsApp प्रतिद्वंदी, लेकिन प्राइवेसी पर सवाल

भारत में डिजिटल आत्मनिर्भरता की लहर के बीच Zoho Corporation का देसी मैसेजिंग ऐप Arattai तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. “Made in India, Made for the World” के नारे के साथ Arattai ने WhatsApp को टक्कर देने की ठानी है. लेकिन जहां एक ओर डाउनलोड्स और यूजर्स की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर प्राइवेसी को लेकर चिंता भी बढ़ रही है.

क्यों बढ़ रही है Arattai की लोकप्रियता?

  • Arattai का मतलब तमिल में “चिट-चैट” होता है
  • 2021 में लॉन्च हुआ यह ऐप अब भारत के टॉप ऐप्स में शामिल हो चुका है
  • डेटा प्राइवेसी, ग्लोबल सर्विलांस और टेक सॉवरेन्टी के मुद्दों पर लोगों की जागरूकता ने इसे बढ़ावा दिया
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इसे अपनाने की अपील की
  • टेक विशेषज्ञ Vivek Wadhwa ने इसे “India’s WhatsApp Killer” बताया.

प्राइवेसी पर सवाल: E2EE की कमी

  • Arattai खुद को प्राइवेसी-फर्स्ट ऐप बताता है
  • लेकिन फिलहाल इसमें टेक्स्ट चैट्स के लिए डिफॉल्ट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) नहीं है
  • WhatsApp, Signal और Telegram जैसी ऐप्स यह सुविधा पहले से देती हैं.

बढ़ती मांग से जूझता इंफ्रास्ट्रक्चर

  • Zoho ने माना है कि अचानक बढ़े ट्रैफिक से OTP डिले, कॉन्टैक्ट सिंक स्लो और साइन-अप में लैग जैसी समस्याएं आ रही हैं
  • कंपनी ने इमरजेंसी आधार पर सर्वर विस्तार शुरू कर दिया है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: क्या Arattai WhatsApp से बेहतर है?

A: फीचर्स में अभी WhatsApp आगे है, लेकिन Arattai का देसी और प्राइवेसी-फोकस्ड अप्रोच इसे खास बनाता है.

Q3: क्या Arattai पूरी तरह भारतीय ऐप है?

A: हां, यह Zoho Corporation द्वारा विकसित एक पूर्णतः भारतीय ऐप है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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