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Home Technology पुराने फोन को बेचने से क्यों बचते हैं लोग? ज्यादातर लोग करते हैं यही गलती

पुराने फोन को बेचने से क्यों बचते हैं लोग? ज्यादातर लोग करते हैं यही गलती

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पुराने फोन को बेचने से क्यों बचते हैं लोग? ज्यादातर लोग करते हैं यही गलती
दराज में रखे गए पुराने मोबाइल और गैजेट // सिंबॉलिक एआई पिक

आपके घर की किसी दराज में अगर कोई पुराना स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट सालों से पड़ा है, तो आप अकेले नहीं हैं. ज्यादातर लोग पुराने गैजेट्स का इस्तेमाल बंद करने के बाद उन्हें बेचने या रीसाइक्लिंग के लिए देने की बजाय संभालकर रख देते हैं. पहली नजर में यह सिर्फ एक आदत लग सकती है, लेकिन इसके पीछे डेटा चोरी का डर, सही जानकारी की कमी और भविष्य में जरूरत पड़ने की उम्मीद जैसी कई वजहें छिपी होती हैं. हालिया रिसर्च भी बताती है कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस दराज में बंद रहने का सबसे बड़ा कारण तकनीकी नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और सुरक्षा से जुड़ा है.

डेटा चोरी का डर बन जाता है सबसे बड़ी वजह

रिसर्च में सामने आया कि अधिकांश लोग अपने पुराने फोन या लैपटॉप को इसलिए नहीं बेचते क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं उनका निजी डेटा गलत हाथों में न पहुंच जाए. कई यूजर्स को लगता है कि डिवाइस से फोटो, बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या निजी फाइलें पूरी तरह मिटाना आसान नहीं है. यही वजह है कि वे जोखिम लेने के बजाय डिवाइस को घर में ही सुरक्षित समझकर रख देते हैं.

रीसाइक्लिंग की जानकारी नहीं होने से भी बढ़ती है समस्या

एक और बड़ी वजह यह है कि लोगों को यह पता ही नहीं होता कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रीसाइक्लिंग कहां और कैसे कराई जाए. जिन लोगों के पास सही जानकारी नहीं थी, उनके पुराने डिवाइस संभालकर रखने की संभावना काफी ज्यादा पाई गई. कई लोग यह भी मानते हैं कि रीसाइक्लिंग या पुराने गैजेट बेचने की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है, जबकि वास्तव में यह पहले की तुलना में काफी आसान हो चुकी है.

कई लोग पुराने फोन को ‘बैकअप’ मानकर रखते हैं

पुराने स्मार्टफोन या लैपटॉप को संभालकर रखने की एक वजह यह भी है कि लोग उन्हें भविष्य के लिए बैकअप डिवाइस मानते हैं. अगर नया फोन खराब हो जाए या किसी जरूरी फाइल की जरूरत पड़ जाए, तो पुराना डिवाइस काम आ सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों तक इस्तेमाल न होने पर ऐसे डिवाइस की कीमत लगातार घटती रहती है और बाद में उनका दोबारा उपयोग या बिक्री करना मुश्किल हो जाता है.

क्या है सही तरीका?

अगर आप अपना पुराना फोन या लैपटॉप बेचने, दान करने या रीसाइक्लिंग के लिए देना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसका पूरा डेटा सुरक्षित तरीके से मिटाएं. इसके बाद डिवाइस को अपने गूगल या एप्पल अकाउंट से हटाना भी जरूरी है. ऐसा नहीं करने पर नया यूजर उस डिवाइस का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाएगा और आपकी निजी जानकारी भी जोखिम में पड़ सकती है.

जागरूकता बढ़ेगी तो कम होंगे ई-वेस्ट के ढेर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोगों को डेटा सुरक्षित तरीके से डिलीट करने और अधिकृत रीसाइक्लिंग विकल्पों की सही जानकारी दी जाए, तो बड़ी संख्या में पुराने गैजेट दोबारा इस्तेमाल या रीसाइक्लिंग के लिए पहुंच सकते हैं. इससे ई-वेस्ट कम होगा, पर्यावरण को फायदा मिलेगा और कई डिवाइस दोबारा उपयोग में लाए जा सकेंगे. ऐसे में अगली बार जब आप अपनी दराज खोलें, तो यह जरूर सोचें कि सालों से रखा पुराना फोन वास्तव में आपके किस काम का है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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