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Home Technology 7 लाख व्यूज के बाद खुली पोल: फेक AI वीडियो पर Meta की लग गई क्लास

7 लाख व्यूज के बाद खुली पोल: फेक AI वीडियो पर Meta की लग गई क्लास

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7 लाख व्यूज के बाद खुली पोल: फेक AI वीडियो पर Meta की लग गई क्लास
AI से बना फेक युद्ध वीडियो हुआ वायरल, Meta पर उठे बड़े सवाल

सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने भ्रामक कंटेंट को लेकर बहस तेज होती जा रही है. इसी बीच Meta एक नये विवाद में घिर गई है. कंपनी के इंडिपेंडेंट मॉनिटरिंग बॉडी Meta Oversight Board ने एक वायरल वीडियो के मामले में Meta की नीतियों पर सवाल उठायेहैं. यह वीडियो एआई की मदद से बनाया गया था और इसमें 2025 के Israel-Iran conflict के दौरान Haifa में इमारतों के भारी नुकसान का दृश्य दिखाया गया था. बाद में जांच में पता चला कि वीडियो असली नहीं था, लेकिन तब तक इसे 7 लाख से अधिक बार देखा जा चुका था.

एआई से बना वीडियो बन गया वायरल

यह वीडियो एक ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया था, जो खुद को न्यूज प्लैटफॉर्म बताता था. बाद में जांच से पता चला कि यह पेज फिलीपींस में रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा था. वीडियो में युद्ध के बाद शहर में तबाही का दृश्य दिखाया गया था, जिससे लोगों को लगा कि यह असली घटना का फुटेज है. हालांकि जांच में सामने आया कि यह पूरा क्लिप एआई टूल्स की मदद से तैयार किया गया था.

लेबल लगाने में भूल पर उठे सवाल

मामले की समीक्षा के बाद Meta Oversight Board ने कहा कि कंपनी को इस वीडियो पर स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाना चाहिए था. Meta के पास AI Info और High Risk AI जैसे लेबल लगाने का सिस्टम है, जिनका उद्देश्य यूजर्स को यह बताना होता है कि कंटेंट एआई से बनाया गया या बदला गया है. लेकिन इस मामले में Meta ने न तो वीडियो हटाया और न ही उस पर हाई रिस्क वाला एआई लेबल लगाया, जबकि कंटेंट की शिकायत पहले ही की जा चुकी थी.

फर्जी अकाउंट से जुड़े प्रोफाइल बंद

बोर्ड ने यह भी कहा कि अकाउंट से जुड़े कई संकेत ऐसे थे जो धोखाधड़ी की ओर इशारा कर रहे थे. समीक्षा के बाद Meta ने उस पेज से जुड़े तीन अकाउंट को बंद कर दिया. इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर एआई से तैयार किये गए वीडियो कितनी तेजी से लोगों को भ्रमित कर सकते हैं.

एआई कंटेंट के लिए अलग नियम बनाने की सलाह

Oversight Board ने Meta को सलाह दी है कि एआई से बने कंटेंट के लिए अलग और स्पष्ट नियम तैयार किये जाएं. फिलहाल ऐसे मामलों को गलत सूचना (misinformation) से जुड़े व्यापक नियमों के तहत देखा जाता है. बोर्ड का मानना है कि यूजर्स को साफ तौर पर बताना जरूरी है कि कब किसी वीडियो, तस्वीर या ऑडियो को एआई से बनाया गया है और ऐसा न बताने पर क्या कार्रवाई होगी.

नयी तकनीक की जरूरत पर जोर

बोर्ड ने यह भी कहा कि मौजूदा सिस्टम काफी हद तक यूजर्स पर निर्भर है कि वे खुद बताएं कि उन्होंने एआई टूल का इस्तेमाल किया है. चूंकि ऐसे खुलासे बहुत कम होते हैं, इसलिए यह तरीका तेजी से फैल रहे एआई मीडिया से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है.

पैनल ने Meta से ऐसे टूल्स विकसित करने की भी सिफारिश की है जो एआई से बने फोटो, ऑडियो और वीडियो को खुद से पहचान सकें. कंपनी को इन सिफारिशों पर जवाब देने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है.

यह भी पढ़ें: फेसबुक-इंस्टाग्राम की कंपनी मेटा की बड़ी डील, एआई फील्ड में खुलकर खेलने को तैयार

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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