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Home Technology पहाड़ और जंगल में भी मिलेगा फुल नेटवर्क, भारत की नयी तैयारी

पहाड़ और जंगल में भी मिलेगा फुल नेटवर्क, भारत की नयी तैयारी

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पहाड़ और जंगल में भी मिलेगा फुल नेटवर्क, भारत की नयी तैयारी
अब नो नेटवर्क का झंझट खत्म / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

भारत में मोबाइल नेटवर्क की सबसे बड़ी परेशानी हमेशा दूर-दराज के इलाकों में कमजोर सिग्नल रही है. पहाड़ों, जंगलों, समुद्री क्षेत्रों और बॉर्डर एरिया में आज भी कई जगह ऐसी हैं जहां कॉल करना या मैसेज भेजना मुश्किल हो जाता है. अब इस समस्या का समाधान सैटेलाइट कनेक्टिविटी के जरिए निकल सकता है. भारत जल्द ऐसी टेक्नोलॉजी की तरफ बढ़ रहा है, जिसमें स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होकर नेटवर्क उपलब्ध करा सकेंगे. यानी आने वाले समय में मोबाइल टावर न होने पर भी फोन में सिग्नल मिल सकते हैं.

अब सिर्फ मोबाइल टावर पर निर्भर नहीं रहेगा नेटवर्क

भारत में डायरेक्ट-टू-डिवाइस यानी D2D सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को लेकर तेजी से काम चल रहा है. इस सिस्टम में स्मार्टफोन सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से जुड़ पाएंगे. इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों में मिलेगा जहां अभी तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है. इससे ट्रेकिंग, पहाड़ी सफर, जंगल सफारी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है.

गूगल और ऐपल जैसी कंपनियां भी दिखा रहीं दिलचस्पी

सैटेलाइट कम्युनिकेशन को लेकर बड़ी टेक कंपनियां भी सक्रिय हो चुकी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक Google और Apple जैसी कंपनियों ने भारत सरकार से इस टेक्नोलॉजी के लिए स्पष्ट नियम और रेगुलेशन बनाने की मांग की है. कंपनियां चाहती हैं कि इमरजेंसी मैसेजिंग और सैटेलाइट आधारित फीचर्स को लेकर एक तय फ्रेमवर्क हो ताकि यूजर्स को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिल सके.

इमरजेंसी में बन सकता है लाइफसेवर फीचर

सैटेलाइट नेटवर्क का सबसे बड़ा फायदा इमरजेंसी हालात में देखने को मिल सकता है. अगर कोई व्यक्ति ऐसी जगह फंस जाता है जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह बंद है, तब भी फोन सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी सेवाओं से संपर्क कर सकेगा. प्राकृतिक आपदा, पहाड़ी दुर्घटना या जंगल में फंसने जैसी स्थितियों में यह टेक्नोलॉजी जान बचाने में मददगार साबित हो सकती है.

लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं

हालांकि यह टेक्नोलॉजी काफी एडवांस मानी जा रही है, लेकिन इसके सामने कुछ बड़ी तकनीकी चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ी समस्या बैटरी खपत की बताई जा रही है. सामान्य मोबाइल टावर की तुलना में सैटेलाइट से कनेक्ट होने में ज्यादा पावर लगती है, जिससे फोन की बैटरी तेजी से खत्म हो सकती है.

इसके अलावा स्मार्टफोन के डिजाइन में भी चुनौती है. आधुनिक फोन पतले और हल्के बनाए जाते हैं, जबकि सैटेलाइट कनेक्टिविटी के लिए बड़े और ताकतवर एंटीना की जरूरत पड़ सकती है. कंपनियां फिलहाल इसी संतुलन को बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं.

भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी का अगला बड़ा कदम

भारत तेजी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहा है और सैटेलाइट नेटवर्क उसी दिशा में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है. आने वाले वर्षों में यह टेक्नोलॉजी न सिर्फ दूरदराज इलाकों की कनेक्टिविटी बदलेगी, बल्कि आपदा प्रबंधन, रक्षा और ट्रैवल सेक्टर में भी बड़ी भूमिका निभा सकती है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो भविष्य में “नो नेटवर्क” जैसी समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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