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Home Technology कहीं टेक्नीशियन आपको भी तो नहीं बना रहा बेवकूफ? जानें एसी गैस रिफिल स्कैम का पूरा खेल

कहीं टेक्नीशियन आपको भी तो नहीं बना रहा बेवकूफ? जानें एसी गैस रिफिल स्कैम का पूरा खेल

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कहीं टेक्नीशियन आपको भी तो नहीं बना रहा बेवकूफ? जानें एसी गैस रिफिल स्कैम का पूरा खेल
ऐसी की मेंटेनेंस करता टेक्नीशियन (Photo: @Imsonali0/X)

एसी की सही कूलिंग तभी मिलती है जब उसमें रेफ्रिजरेंट यानी गैस सही लेवल में हो. कई लोग मान लेते हैं कि हर सर्विस के दौरान AC में गैस भरवाना जरूरी है. लेकिन सच तो यह है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. बिना जरूरत गैस भरवाने से आपकी सिर्फ जेब ही खाली होती है. नीचे हमने एक गाइड तैयार की है कि ऐसी गैस रिफिलिंग आखिर होती क्या है, कब इसकी सच में जरूरत पड़ती है, और कैसे आप खुद पहचान सकते हैं कि एसी में लीकेज है या कूलिंग कम हो रही है. साथ ही, बाजार में होने वाले फ्रॉड और सर्विस से जुड़े घोटालों के बारे में भी हमने बताया है, ताकि आप अलर्ट रहें.

कब होती है AC की गैस लीक?

एसी की गैस पेट्रोल या डीजल की तरह खर्च नहीं होती. यह एक बंद सिस्टम में लगातार घूमती रहती है. इसलिए, अगर आपका एसी पहले जैसी कूलिंग नहीं दे रहा, तो समझ लीजिए कि कहीं न कहीं गैस लीक हो रही है. इसके अलावा, अगर आपको आउटडोर यूनिट के पास सीटी जैसी आवाज सुनाई दे या कॉपर पाइप पर बर्फ जमती दिखे, तो ये भी गैस लीक होने के संकेत हैं.

अब सवाल है कि गैस लीक होती क्यों है? इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं. जैसे कॉइल में दरार आ जाना, जॉइंट का ढीला होना या समय के साथ जंग लग जाना. कई बार गलत या खराब इंस्टॉलेशन भी धीरे-धीरे गैस लीक का कारण बन जाता है.

टेक्नीशियन कैसे करते हैं स्कैम?

अगर आपका एसी कमरे को ठंडा करने में जरूरत से ज्यादा समय लेने लगा है, तो समझ जाइए कि इसका रेफ्रिजरेंट यानी कूलिंग गैस कम हो गया है. यही वो गैस होती है, जो गर्मी को सोखकर बाहर निकालती है. ऐसे में किसी अच्छे टेक्नीशियन को तुरंत दिखाना चाहिए. लेकिन यहां एक बात का खास ध्यान रखें.

अगर टेक्नीशियन बिना किसी जांच-पड़ताल के सिर्फ गैस भरने की सलाह दे दे और लीकेज के बारे में एक शब्द भी न कहे, तो थोड़ा अलर्ट हो जाइए. क्योंकि एसी में गैस अपने आप खत्म नहीं होती. वह केवल लीकेज होने पर ही बाहर निकलती है. ऐसे में सिर्फ गैस भरवाना प्रॉब्लम का सॉल्यूशन नहीं है. कुछ समय बाद गैस फिर से खत्म हो जाएगी और आपको दोबारा सर्विस के लिए कॉल करना पड़ेगा.

असल समाधान है ऐसी का प्रेशर टेस्ट करवाना. इस टेस्ट से पता चलता है कि लीकेज कहां है. जब लीकेज वाली जगह मिल जाए, तो उसे ठीक से सील कराया जाना चाहिए. उसके बाद ही नई गैस भरवाना सही रहता है. वरना ये ऐसा ही है जैसे छेद वाली बाल्टी में पानी भरते रहना.

AC रिफिल स्कैम से कैसे बचें?

अगर आपका एसी टेक्नीशियन हर साल यही कहता है कि ‘गैस खत्म हो गई है’, लेकिन कभी लीकेज की बात नहीं करता, तो समझ जाइए कि मामला थोड़ा गड़बड़ है. सबसे पहले खुद यह चेक करें कि वाकई एसी में गैस कम है या नहीं. कई बार टेक्नीशियन बिना जरूरत के भी गैस रिफिल कराने की सलाह देते हैं. अगर गैस सच में कम निकले, तो टेक्नीशियन से साफ तौर पर कहें कि वह पहले लीकेज चेक करे. 

लीकेज ढूंढने के लिए आमतौर पर टेक्नीशियन साबुन वाले पानी का इस्तेमाल करते हैं. बिल्कुल वैसे ही जैसे पंचर बनाने वाले टायर में छेद ढूंढते हैं. पाइप या कॉइल पर साबुन का घोल छिड़का जाता है. अगर बुलबुले बनने लगें, तो समझिए लीकेज है. और अगर बुलबुले नहीं बनते, तो सिस्टम बिल्कुल ठीक है. सबसे जरूरी बात, हमेशा ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर या भरोसेमंद कंपनी से ही ऐसी की सर्विस करवाएं.

यह भी पढ़ें: एसी की सर्विसिंग करवाने जा रहे हैं? ध्यान में रखें ये 5 बातें, पैसे और टेंशन दोनों बचेंगे

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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