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Home Technology Bumble पर हुई दोस्ती, शेयर मार्केट के नाम पर बिछाया जाल, मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर से 21.5 लाख रुपये की ठगी

Bumble पर हुई दोस्ती, शेयर मार्केट के नाम पर बिछाया जाल, मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर से 21.5 लाख रुपये की ठगी

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Bumble पर हुई दोस्ती, शेयर मार्केट के नाम पर बिछाया जाल, मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर से 21.5 लाख रुपये की ठगी
डेटिंग ऐप स्कैम से सावधान रहें // एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स लोगों को नये रिश्ते बनाने का मौका देती हैं, लेकिन साइबर अपराधी अब इन्हीं प्लैटफॉर्म्स को ठगी का हथियार बना रहे हैं. मुंबई में रहने वाले एक इंटीरियर डिजाइनर के साथ ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां डेटिंग ऐप पर हुई एक दोस्ती ने उन्हें लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा दिया. कथित तौर पर एक महिला ने पहले भरोसा जीता, फिर निवेश का लालच देकर करीब 21.5 लाख रुपये की रकम अपने जाल में फंसा लिया.

डेटिंग ऐप से शुरू हुई बातचीत

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित की मुलाकात एक महिला से ऑनलाइन डेटिंग प्लैटफॉर्म बम्बल पर हुई थी. महिला ने खुद को दिल्ली निवासी बताया और अपना नाम अनाया शर्मा बताया. शुरुआती बातचीत सामान्य रही, लेकिन कुछ दिनों बाद दोनों के बीच लगातार संपर्क बढ़ने लगा. इसके बाद महिला ने बातचीत को दूसरे प्लैटफॉर्म पर ले जाने का सुझाव दिया और व्हाट्सऐप पर चैटिंग शुरू हो गई.

शेयर मार्केट में भारी मुनाफे का सपना दिखाया

व्हाट्सऐप पर बातचीत के दौरान महिला ने दावा किया कि वह शेयर मार्केट में निवेश करके बड़ी कमाई कर रही है. उसने खुद को सफल निवेशक बताते हुए करोड़ों रुपये के मुनाफे की कहानियां सुनाईं. लगातार बातचीत और भरोसा बनने के बाद उसने इंटीरियर डिजाइनर को भी निवेश करने के लिए प्रेरित किया.

महिला ने एक ऑनलाइन लिंक भेजा और कहा कि निवेश शुरू करने के लिए वहां अकाउंट बनाना होगा. शुरुआत में पीड़ित ने 50 हजार रुपये लगाए. कुछ ही समय बाद ऑनलाइन डैशबोर्ड पर उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा दिखने लगा, जिससे उनका भरोसा और मजबूत हो गया.

फर्जी प्रॉफिट देखकर बढ़ता गया निवेश

शुरुआती रकम पर कथित तौर पर बढ़िया रिटर्न दिखाई देने के बाद पीड़ित ने कई चरणों में और पैसा निवेश करना शुरू कर दिया. हर बार डैशबोर्ड पर बढ़ती रकम देखकर उसे लगा कि उसका निवेश सही दिशा में जा रहा है. इसी दौरान उसने अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल लगभग 21.5 लाख रुपये जमा कर दिए.

कुछ समय बाद उसके वर्चुअल वॉलेट में 76 हजार डॉलर से ज्यादा की राशि दिखाई गई, जिसकी भारतीय कीमत करीब 69 लाख रुपये बताई गई. लेकिन जब उसने यह रकम निकालने की कोशिश की तो सिस्टम ने निकासी की अनुमति नहीं दी.

पैसा निकालने के लिए मांगा गया ‘टैक्स’

जब पीड़ित ने कथित मुनाफे की रकम निकालने के लिए मदद मांगी, तो उससे कहा गया कि पहले टैक्स के रूप में अतिरिक्त भुगतान करना होगा. उन्हें कुल रकम का लगभग 30 प्रतिशत जमा करने के लिए कहा गया. यहीं से उसे पूरे मामले पर शक हुआ.

जैसे-जैसे नई-नई शर्तें सामने आने लगीं, पीड़ित को समझ में आ गया कि वह एक बड़े साइबर निवेश घोटाले का शिकार हो चुका है. इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई.

तेजी से बढ़ रहे हैं ऑनलाइन निवेश वाले साइबर स्कैम

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं. ठग पहले सोशल मीडिया या डेटिंग ऐप्स के जरिए दोस्ती करते हैं, फिर भरोसा जीतकर निवेश के लिए प्रेरित करते हैं. नकली वेबसाइट और फर्जी डैशबोर्ड के जरिए लोगों को काल्पनिक मुनाफा दिखाया जाता है ताकि वे ज्यादा से ज्यादा रकम जमा करें.

ऐसे मामलों में किसी भी अनजान व्यक्ति की निवेश सलाह पर भरोसा करने से बचना चाहिए. निवेश से पहले प्लैटफॉर्म की वैधता जांचना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करना जरूरी है. यदि किसी व्यक्ति को साइबर ठगी का शक हो तो वह तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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