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Home Technology AC खरीदते समय सिर्फ टन पर मत अटकिए, ये 1 फैक्टर बदल देगा आपका फैसला

AC खरीदते समय सिर्फ टन पर मत अटकिए, ये 1 फैक्टर बदल देगा आपका फैसला

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AC खरीदते समय सिर्फ टन पर मत अटकिए, ये 1 फैक्टर बदल देगा आपका फैसला
AC शोरूम और सोचता हुआ एक शख्स (Photo: Canva)

AC खरीदते समय लोग अक्सर 1 टन, 1.5 टन या 2 टन के बीच उलझ जाते हैं. आमतौर पर हम सोचते हैं कि जितना ज्यादा टन होगा, उतनी बेहतर कूलिंग मिलेगी. लेकिन असल कहानी इतनी सीधी नहीं है. टन के अलावा एक और बहुत जरूरी चीज होती है. हम बात कर रहे हैं कूलिंग कैपेसिटी (Cooling capacity) की. यह आपके रूम को कितनी जल्दी और कितने प्रभावी तरीके से ठंडा करेगा, उसमें बड़ा रोल निभाती है. यही चीज आपके बिजली के बिल और AC की परफॉर्मेंस पर असर डालती है.

कूलिंग कैपेसिटी का क्या मतलब है?

कूलिंग कैपेसिटी का मतलब होता है कि कोई AC एक तय समय में कमरे से कितनी गर्मी बाहर निकाल सकता है. आसान शब्दों में समझें तो, यह बताता है कि आपका AC कितनी तेजी से कमरे को ठंडा करेगा और कितनी अच्छी तरह से टेम्परेचर को बनाए रखेगा. इसे आमतौर पर वॉट (watts) में मापा जाता है. जितनी ज्यादा कूलिंग कैपेसिटी होगी, उतनी जल्दी कमरा ठंडा होगा और AC उतना ही एफ्फिसिएंट माना जाएगा.

उदाहरण के लिए, दो 1.5-ton AC एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन उनकी कूलिंग कैपेसिटी अलग हो सकती है. एक 3,500W का हो सकता है, जबकि दूसरा 5,000W या उससे ज्यादा भी दे सकता है. यही फर्क तय करता है कि आपका रूम कितनी जल्दी ठंडा हो जाएगा.

सिर्फ टन काफी क्यों नहीं होती है?

AC का टन सिर्फ यह बताता है कि वह किस साइज के कमरे के लिए बनाया गया है. लेकिन इससे यह पता नहीं चलता कि वह कितनी तेजी और कितनी अच्छी तरह कूलिंग करेगा. अगर आप सिर्फ टन देखकर AC चुन लेते हैं और उसकी कूलिंग कैपेसिटी पर ध्यान नहीं देते, तो हो सकता है कमरा ठंडा होने में ज्यादा समय लगे. नतीजा ये होगा कि AC ज्यादा देर तक चलेगा और बिजली की खपत भी बढ़ जाएगी. 

बिजली बिल पर असर

कम कूलिंग कैपेसिटी वाला AC कमरे को ठंडा करने में ज्यादा समय लेता है, इसलिए उसे लंबे समय तक चलाना पड़ता है. जितना ज्यादा देर तक AC चलता है, उतनी ही ज्यादा बिजली खर्च होती है और आपका बिल भी बढ़ जाता है.

वहीं दूसरी तरफ, ज्यादा कूलिंग कैपेसिटी वाला AC कमरे को जल्दी ठंडा कर देता है और फिर अपने आप बंद हो जाता है या कम चलने लगता है. इससे उसका टोटल रन टाइम कम होता है और बिजली की बचत होती है.

यह भी पढ़ें: डीप क्लीनिंग के बाद भी AC नहीं कर रहा कूलिंग? वजह हो सकता है अंदर का ये जरूरी पार्ट

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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