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Home पश्चिम-बंगाल सिलीगुड़ी दार्जिलिंग की वादियों में गूंजी ‘लोकतंत्र’ की सीटी! मतदान बढ़ाने के लिए चली ‘डेमोक्रेसी एक्सप्रेस’

दार्जिलिंग की वादियों में गूंजी ‘लोकतंत्र’ की सीटी! मतदान बढ़ाने के लिए चली ‘डेमोक्रेसी एक्सप्रेस’

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दार्जिलिंग की वादियों में गूंजी ‘लोकतंत्र’ की सीटी! मतदान बढ़ाने के लिए चली ‘डेमोक्रेसी एक्सप्रेस’

Darjeeling Democracy Express: बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से पहले दार्जिलिंग की पहाड़ियों में एक अनोखी पहल देखने को मिली. पहाड़ों के दुर्गम क्षेत्रों में मतदाताओं को जागरूक करने और चुनावी भागीदारी बढ़ाने के लिए दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (DHR) ने विशेष टॉय ट्रेन ‘डेमोक्रेसी एक्सप्रेस’ (Democracy Express) चलायी. नीले रंग की इस ऐतिहासिक ट्रेन ने अपनी यात्रा के जरिये संदेश दिया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर वोट की कीमत अनमोल है.

बटासिया लूप तक लोकतंत्र का सफर

दार्जिलिंग और कलिम्पोंग में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान में वोटिंग बढ़ाने के लिए प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है. इसी कड़ी में शुक्रवार को इस विशेष ट्रेन को दार्जिलिंग स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. ट्रेन ने दार्जिलिंग स्टेशन से प्रसिद्ध बटासिया लूप तक करीब 5 किलोमीटर की दूरी तय की. यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में विख्यात टॉय ट्रेन ने पर्यटकों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा.

Darjeeling Democracy Express: पहाड़ों में मतदान का उत्सव

डीएचआर के अधिकारियों के अनुसार, यह पहल केवल एक रेल यात्रा नहीं थी, बल्कि चुनावी महत्व को समझाने का एक सशक्त माध्यम था. ट्रेन के डिब्बों पर मतदान से जुड़े पोस्टर और संदेश लगाये गये थे. पहाड़ों के कई इलाके दूर-दराज के हैं, जहां डिजिटल संदेशों से अधिक प्रभावी इस तरह की जमीनी गतिविधियां होती हैं. प्रशासन का लक्ष्य पहाड़ी क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत पिछले सभी रिकॉर्ड्स को पार करने का है.

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23 अप्रैल को ‘पहाड़’ का फैसला

बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में दार्जिलिंग और कलिम्पोंग की सीटों पर मतदान होना है. ऐसे में ‘डेमोक्रेसी एक्सप्रेस’ ने कंचनजंघा की तलहटी में चुनावी बिगुल फूंक दिया है. पर्यटकों के लिए भी यह एक सुखद अनुभव रहा, जहां उन्होंने दर्शनीय यात्रा के साथ-साथ भारतीय लोकतंत्र के महापर्व की झलक भी देखी.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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